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फर्जीवाड़े के बाद शस्त्र लाइसेंसों का सत्यापन शुरू

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पलवल। जिले में एक जनवरी 2018 से 31 जुलाई 2019 के बीच बनाए गए शस्त्र लाइसेंसों की जिला प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। नौ फर्जी लाइसेंस बनाने और उसमें एक लिपिक की संलिप्ता पाए जाने के बाद यह कदम उठाया गया है। नगराधीश जितेंद्र कुमार ने सभी शस्त्र लाइसेंस धारकों को नोटिस जारी कर 15 दिन के अंदर अपने लाइसेंसों का सत्यापन कराने के निर्देश दिए हैं।
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शस्त्रधारकों को सत्यापन कराने के लिए जारी किए गए नोटिस में नगराधीश जितेंद्र कुमार ने कहा है कि 1 जनवरी 2018 से 31 जुलाई 2019 के दौरान जिन लोगों ने लाइसेंस बनवाए हैं वह सत्यापन अवश्य करा लें। लाइसेंस धारक जिलाधीश पलवल कार्यालय की शस्त्र लाइसेंस शाखा (पीएलए शाखा) में 15 दिन के अंदर सत्यापन करा सकते हैं। सत्यापन न करवाने की स्थिति में यदि किसी का लाइसेंस फर्जी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने बताया कि इस अवधि के दौरान पलवल जिले में करीब नौ फर्जी लाइसेंस पकड़े गए थे। इसके बाद सुनील पुत्र दुर्गा प्रसाद के खिलाफ 27 जुलाई 2019 को आपराधिक मुकदमा दर्ज किया गया था। इसलिए सत्यापन कराया जा रहा है।
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पूर्व नायब तहसीलदार का पुत्र हुआ था गिरफ्तार
जुलाई 2019 में तत्कालीन उपायुक्त यशपाल यादव को शिकायत मिली थी कि पलवल में कुछ लोग फर्जी शस्त्र लाइसेंस बना रहे हैं। उपायुक्त ने पुलिस कप्तान से मिलकर मामले में जांच कराई, जिसमें पाया गया कि एक जनवरी से 31 जुलाई के बीच बनाए गए लाइसेंसों में काफी फर्जी हैं। उस समय नौ फर्जी लाइसेंस भी मिले थे। इसके बाद पूर्व नायब तहसीलदार दुर्गा प्रसाद के पुत्र सुनील को गिरफ्तार किया गया था। सुनील उस समय जिला उपायुुक्त कार्यालय के तहत अंत्योदय सरल केंद्र पलवल में कार्यरत था। जांच में सामने आया कि वह अपने साथियों के साथ फर्जी लाइसेंस बनाता है। इसके एवज में 60 हजार रुपये लेता था।
नौ फर्जी लाइसेंस व उस मामले में गिरफ्तार एक लिपिक की संलिप्ता के बाद से ही मामले की जांच चल रही है। अब एक जनवरी 2018 से 31 जुलाई 2019 के बीच जिले में जितने भी लाइसेंस बनाए गए हैं, उन सभी का सत्यापन किया जा रहा है। उसी को लेकर सभी शस्त्र लाइसेंस धारकों को नोटिस भेजे गए हैं।
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-जितेंद्र कुमार, नगराधीश पलवल
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