पलवल। महात्मा गांधी सामुदायिक किसान एवं पंचायत भवन में शुक्रवार को ग्रीवेंस कमेटी की बैठक हुई। इस दौरान सहकारिता मंत्री डॉ. बनवारी लाल ने 12 में से सात मामलों का निपटारा किया। हालांकि मंत्री के आने की सूचना पर किसान पहुंच गए और विरोध-प्रदर्शन किया, लेकिन इससे पहले मंत्री वहां से चले जा चुके थे।
जिला ग्रीवेंस कमेटी की बैठक में कुल 12 शिकायतें रखी गईं। जिनमें से 7 शिकायतों का मौके पर ही समाधान करा दिया गया। पहली शिकायत में मंत्री ने अधिकारी के यूजर नेम व पासवर्ड का इस्तेमाल कर अनाधिकृत रूप से एक खंड में राशि ट्रांसफर करने में बरती गई अनियमितता व धोखाधड़ी करने वाले एक कर्मचारी व दूसरे मामले में पंचायत फंड में गलत लेन-देन होने के कारण ग्राम सचिव को निलंबित कर दोबारा जांच करने के आदेश दिए। राइस मिलर्स की हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के अधिकारी द्वारा मिल सील करने की धमकी देने, पैसे ऐंठने के संबंध में की गई शिकायत पर मिल मालिकों के पैसे वापस दिलाने व एसआईटी गठित कर जांच के आदेश दिए।
गांव इनायतपुर पंचायत गुलावद निवासी संजय की शमशानघाट की चारदीवारी, स्ट्रीट लाइट आदि के कार्य में सरपंच द्वारा पैसों का गबन करने की शिकायत पर जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की अध्यक्षता में जांच करने के आदेश दिए। गांव भिडूकी निवासी धर्मवीर की पंचायती जमीन पर कब्जा करने व गांव प्रह्लादपुर निवासी दीपचंद की शिकायत 100 वर्ग गज के प्लाट पर कब्जे संबंधी शिकायत पर संबंधित विभागों के अधिकारियों ने शिकायतों का निपटान करने के बारे में बताया। वहीं गांव औरंगाबाद निवासी दरियाब सिंह की शिकायत फिरनी के पास बनी पाइप लाइन में पानी जमा होने पर जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग के कार्यकारी अभियंता ने निपटाने का दावा किया। बैठक में भाजपा नेता प्रवीण ग्रोवर ने उपायुक्त निवास के सामने बने कट को कार व बाइकों के लिए खुलवाने की मांग रखी। जिस पर मंत्री ने खुलवाने के आदेश दिए। इस मौके पर पलवल विधायक दीपक मंगला, पुलिस अधीक्षक दीपक गहलावत, जिला नगर आयुक्त मोनिका गुप्ता, अतिरिक्त उपायुक्त सतेंद्र दूहन, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमित कुमार आदि मौजूद रहे।
कार्यक्रम सार्वजनिक नहीं होने पर देरी से पहुंचे किसान
किसानों के विरोध को देखते हुए पंचायत भवन से लेकर विश्रामगृह तक पुलिस बल के अलावा केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की टीम तैनात की गई थी। हालांकि ग्रीवेंस कमेटी की बैठक के बारे में जिला प्रशासन ने किसानों के विरोध को देखते हुए कार्यक्रम सार्वजनिक नहीं किया था। ऐसे में किसानों को उनके आने की भनक देरी से लगी और वे लोग 11 बजे करीब पहुंचे। तब तक मंत्री बैठक लेकर जा चुके थे।