नूंह से बड़कली चौक, पिनगवां और पुन्हाना तक सार्वजनिक शौचालयों की हालत बदहाल
कहीं निर्माण अधूरा, कहीं लटके हैं ताले तो कहीं गंदगी और दुर्गंध
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। स्वच्छता के दावे और सरकारी योजनाओं की हकीकत के बीच जिले के सार्वजनिक शौचालयों की बदहाली एक बड़ा सवाल बनकर सामने आई है। बाजारों में खरीदारी करने आने वाले लोगों को जब शौचालय की जरूरत पड़ती है तो उन्हें सुविधा नहीं मिलती। कहीं लाखों रुपये की लागत से बने शौचालयों पर ताले लटके हैं, कहीं निर्माण अधूरा पड़ा है तो कहीं गंदगी और दुर्गंध के कारण लोग अंदर जाने से भी कतराते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को उठानी पड़ती है। शनिवार को जिले के नूंह, बड़कली चौक, पिनगवां और पुन्हाना में की गई पड़ताल में सार्वजनिक सुविधाओं की स्थिति चिंताजनक नजर आई।
नूंह शहर : सालभर में भी छह शौचालय तैयार नहीं
जिला मुख्यालय नूंह में नगर परिषद की ओर से अलग-अलग स्थानों पर करीब 72 लाख रुपये की लागत से छह सार्वजनिक शौचालय बनवाए जाने थे। निर्माण शुरू हुए करीब एक साल बीतने के बाद भी ये शौचालय पूरी तरह तैयार होकर लोगों के उपयोग में नहीं आ पाए हैं। कुछ शौचालय बनकर तैयार दिखाई देते हैं, लेकिन उन पर ताले लगे होने से लोग उनका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। बाजार में खरीदारी करने आए लोगों को जरूरत पड़ने पर इधर-उधर भटकना पड़ता है। मजबूरी में कुछ लोग खुले स्थानों का रुख करते हैं, जिससे स्वच्छता व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
बड़कली चौक पर पांच साल से बदहाली
मेवात की राजधानी कहे जाने वाले बड़कली चौक पर भी सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति सुधरने का नाम नहीं ले रही। यहां पिछले करीब पांच साल से शौचालय बदहाल बताए जा रहे हैं। इनकी मरम्मत के लिए करीब साढ़े तीन लाख रुपये खर्च किए जाने की योजना थी, लेकिन मरम्मत और साफ-सफाई की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिखा। दिनभर आवाजाही वाले इस चौक पर यात्रियों, दुकानदारों और राहगीरों को परेशानी झेलनी पड़ती है। सवाल है कि जब मरम्मत के लिए बजट निर्धारित किया गया था तो सुविधा बहाल क्यों नहीं हो सकी?
पिनगवां में ताले, पुन्हाना में गंदगी का अंबार
कस्बा पिनगवां में लाखों रुपये की लागत से बनाए गए सार्वजनिक शौचालय भी जिम्मेदारों की अनदेखी के कारण बदहाल हैं। ताले लगे होने से लोगों को खुले में शौच जाने की मजबूरी का सामना करना पड़ता है। वहीं, पुन्हाना में जमालगढ़ रोड के पास बने सार्वजनिक शौचालयों के आसपास गंदगी के ढेर लगे हैं। दुर्गंध के कारण लोग इनका इस्तेमाल करने से बचते हैं। इसके विपरीत नगर पालिका कार्यालय में करीब ढाई लाख रुपये की लागत से बनाए गए दो शौचालय साफ-सुथरे नजर आते हैं। इससे रखरखाव और निगरानी की व्यवस्था पर सवाल उठता है।
वर्जन
बंद शौचालयों की जानकारी मेरे संज्ञान में नहीं है। जल्द ही टीम गठित कर जानकारी जुटाई जाएगी। अगर शौचालयों पर ताले लगे हुए हैं तो उनको खुलवाया जायेगा और जल्द शौचालयों की मरम्मत कर उन्हें ठीक कराया जायेगा।
- शशि वसुंधरा, डीएमसी, नूंह
लोगों से बातचीत
बाजार में खरीदारी करने के लिए घर से निकलते हैं तो शौचालय की जरूरत पड़ने पर परेशानी होती है। महिलाओं के लिए साफ और सुरक्षित जगह होना जरूरी है। लाखों खर्च के बाद भी सुविधा नहीं मिल रही।
- शाहरुख खान
बाजार में बड़ी संख्या में लोग आते हैं। सार्वजनिक शौचालय बंद रहने या गंदे होने से परेशानी होती है। इसका असर बाजार की स्वच्छता पर भी पड़ता है। जिम्मेदार अधिकारियों को नियमित जांच करची चाहिए।
- मुबारिक अटेरना
यह चौक काफी व्यस्त है। यहां से दिनभर लोग गुजरते हैं। पांच साल से शौचालयों की हालत खराब रहना चिंता की बात है। मरम्मत के लिए बजट होने के बावजूद सुविधा नहीं मिल रही तो इसकी जांच होनी चाहिए।
- मुस्तफिज खान
शौचालय बनवाने का उद्देश्य लोगों को सुविधा देना है, लेकिन ताले लगे हो तो निर्माण का क्या फायदा? प्रशासन को इन्हें खुलवाना चाहिए और सफाई के लिए कर्मचारी तैनात करने चाहिए, ताकि लोग खुले में जाने को मजबूर न हों।
- अहमद खान
शौचालयों पर लगे ताले।