शहर का जिलास्तरीय अग्निशमन विभाग बीमार अवस्था में है। विभाग के पास न तो पर्याप्त कर्मचारी हैं और न ही संसाधन। अगर ऊंचे भवनों या किसी वाणिज्यिक परिसर में आग लग जाए तो काबू पाना भी मुश्किल हो जाएगा। उस पर भी विभाग का कार्यालय व भवन भी शहर के भीड़भाड़ वाले ऐसे स्थान पर बना है, जहां से निकलने में ही हालत खराब हो जाती है। ऐसे में घटनास्थल में पहुंचने में घंटों लग सकते हैं। खुदा न खास्ता अगर शहर के बीचोंबीच कहीं आग लग जाए तो पूरा शहर राख हो सकता है।
फायर बिग्रेड का भवन व कार्यालय पुराने जीटी रोड पर शहर के भीड़ भरे मार्ग पर है। इस मार्ग के दोनों तरफ अक्सर जाम लगा रहता है, जिसके चलते वाहनों का निकलना भी मुश्किल हो जाता है। अगर किसी बहुमंजिला इमारत में आग लग जाए तो विभाग के पास वहां तक पानी की मार करने के लिए टर्न टेबल लैडर (आधुनिक स्वचालित सीढ़ी) तक मौजूद नहीं है। फायरमैन आग के बीच जाकर आग पर काबू पाना चाहें तो इसके लिए अग्निरोधक सूट भी नहीं हैं। इसके अलावा किसी इंडस्ट्री में आग लग जाए तो वहां के कैमिकल युक्त धुंए का सामना करने के लिए श्वसन शोधक मास्क भी नहीं हैं।
इसके अलावा विभाग में कर्मचारियों की भी भारी कमी है। विभाग के पास छह गाड़ियां हैं, जिनमें से एक तो पूरी तरह से कंडम हो चुकी है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो आबादी के हिसाब से यहां कम से कम 45 कर्मचारी होने चाहिए, लेकिन कार्यरत मात्र 15 हैं। जिनमें से पांच नियमित हैं, बाकी दस अनुबंध के आधार पर रखे गए हैं।
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आबादी के बीच में होना भी खतरे का सूचक :
-अग्निशमन विभाग का भवन व कार्यालय पुराना जीटी रोड पर बाल भवन के समीप है। यह एरिया घनी आबादी वाला है, जहां हमेशा भीड़-भाड़ रहती है। कार्यालय के एक तरफ तो मीनार गेट चौक है व दूसरी तरफ कमेटी चौक व भवनकुंड का एरिया। इन सभी स्थानों पर तो अधिकांशत: जाम लगा रहता है। गंभीर परिस्थिति में यहां से निकलना भी मुश्किल भरा साबित हो सकता है।
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-फरीदाबाद में चार दिन पूर्व लगी आग के बाद आप की टीम ने यहां की फायर सेवाओं को भी जांचा। हालात यह है कि अगर शहर में कहीं बहुमंजिला इमारत में आग लग गई तो, भारी तबाही मच सकती है। सरकार को इस तरफ ध्यान देते हुए संसाधन उपलब्ध कराने चाहिए।
-कुलदीप कौशिक, जिला संयोजक, आम आदमी पार्टी।
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-विभाग को लंबे समय से उक्त संसाधनों की दरकार है, ताकि गंभीर परिस्थिति में भी आग पर काबू पाया जा सके। विभाग के कार्यालय को भी शहर से बाहर स्थानांतरित करने के लिए विभागीय अधिकारियों को लिखा गया है। जनसंख्या के अनुसार कर्मचारी भी कम हैं।
-लेखराम, फायर अधिकारी।