- तीन दिन तक व्रती महिलाएं कठिन साधना करेंगी
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। पूर्वांचल जनकल्याण समिति के तत्वावधान में जिले में शुक्रवार को चार दिवसीय छठ महोत्सव नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया। पूर्वांचल के लोगों ने छठ महोत्सव के तहत नहाय-खाय का व्रत रखा। यह निर्जला व्रत तीन दिन तक चलेगा। 20 नवंबर को सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोला जाएगा। व्रतधारी महिलाओं ने शुक्रवार को घरों में परंपरागत तरीके से पूजा की तथा प्रसाद बनाया। पूर्वांचल के लोगों में छठ महोत्सव को लेकर बेहद उत्साह नजर आ रहा है।
बनाया गया कद्दू-भात
नहाय खाय का व्रत रखने के दौरान विशेष पूजा की गई तथा बिना मसाले के कद्दू की सब्जी व भात बनाया गया तथा उसका सेवन किया गया। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत से तन-मन निर्मल रहता है। पर्व के पहले दिन महिलाओं ने स्नान किया तथा नाखून काटकर शरीर को पूरी तरह से स्वच्छ किया। सुबह से ही पूर्वांचल के लोग इस व्रत की तैयारियों में जुट गए थे। छठ महोत्सव को लेकर विशेष तैयारियां की गईं तथा पूजन के लिए खरीद की गईं।
आज रहेगा निर्जला व्रत
इस महोत्सव के तहत 18 नवंबर को खरना होगा। इस दिन निर्जला व्रत होगा। इसे ज्ञान पंचमी भी कहा जाता है। शनिवार को इस व्रत के तहत सूखी रोटी और गुड़ की खीर व केला अर्पित कर छठ मइया की पूजा प्रारंभ होगी। तीन दिन तक व्रती महिलाएं कठिन साधना करेंगी। बिस्तर के बजाय चटाई पर सोया जाएगा। व्रती महिलाएं उसी कमरे में सोएंगी, जहां अर्घ्य के पकवान बनाए जाते हैं। स्वच्छता का बहुत ध्यान रखा जाएगा। 19 नवंबर को तीसरे दिन सायंकालीन डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।
अगवानपुर घाट तैयार
छठ पर होने वाली सामूहिक पूजा के लिए अगवानपुर स्थित घाट अब पूरी तरह तैयार है। घाट रंग-रोगन होने के बाद काफी चमक रहा है। शुक्रवार को घाट में पानी भरा जाएगा। यहां मेला लगेगा तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे व शनिवार को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। रविवार को भंडारा आयोजित किया जाएगा। समिति के प्रधान विजय पटेल ने बताया कि छठ महोत्सव को लेकर पूर्वांचल के लोगों में बेहद उत्साह है। 18 नवंबर को खरना होगा तथा 19 नवंबर को डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। महोत्सव की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस अवसर पर पर्व को बेहतर तरीके से मनाने के लिए बैठक भी हुई। जिसमें पूर्वांचल जनकल्याण समिति के बृजेश शाह, पशुपतिनाथ मिश्रा, रामवृक्ष मुंशी, गणेश मुखिया, प्रमोद कुमार, आनंंद कुमार, दिलीप शाह, पवन कुमार, चतर सिंह प्रमुख रूप से मौजूद थे।
छठ पूजा का महत्व
छठ पूजा यानी सूर्योपासना है। यह उपासना मानव मात्र अन्त:करण का संबल है। उपास्य के प्रति उपासक की आस्था विश्वास एवं एकाग्रता शीघ्र फलदायिनी है। सूर्य प्रत्यक्ष देव हैं। इनकी उपासना का लाभ भी अप्रत्यक्ष है। इसलिए रोग निवारण के लिए भास्कर यानी सूर्य देव की उपासना की जाती है। नीति शास्त्रों में कहा है कि यदि लक्ष्मीपति विष्णु भगवान स्वयं भी सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय शयन करें तो लक्ष्मी उन्हें भी छोड़ देगी। क्योंकि सूर्य एश्वर्य तथा समृद्धि के प्रदाता है। नेत्र ज्योति के लिए सूर्योपासना जरूरी है।
- डॉ. पशुपतिनाथ मिश्रा, पंडित पूर्वांचल जनकल्याण समिति