उद्घाटन की बाट जोह रहा बड़ौली अस्पताल
प्रवीण बैंसला
पलवल। केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर के गोद लिए गांव बड़ौली में बना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र निर्माण के दो वर्ष बाद भी शुरू नहीं हो पाया है। दो लाख की आबादी को स्वास्थ्य लाभ देने के उद्देश्य से बना अस्पताल असामाजिक तत्वों का अड्डा बना हुआ है। अस्पताल परिसर में बैठकर लोग नशा करते हैं और गंदगी फैलाते हैं। रख-रखाव के लिए कोई कर्मचारी नहीं होने के कारण बिल्डिंग खराब होने लगी है।
बड़ौली और इसके आसपास के करीब 20 गांवों को लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए 20 सितंबर 2013 को तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की आधारशिला रखी थी। केंद्र 18 महीने में बनकर तैयार होना था, लेकिन लोक निर्माण विभाग की लापरवाही के कारण काम पांच वर्षों तक लटका रहा। 2019 की शुरुआत में काफी अटकलों के बाद अस्पताल का भवन बनकर तैयार हुआ, लेकिन आज तक शुरू नहीं हुआ।
गांव बड़ौली निवासी ऊधम सिंह, देशराज, शोभराज, राजेंद्र, नन्नू बैंसला का कहना है कि अस्पताल के भवन का काम पिछले छह वर्षों से चल रहा था। दो वर्ष पहले काम भी पूरा हो गया है। अस्पताल शराबियों का अड्डा बन चुका है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में कोई बड़ा सरकारी अस्पताल नहीं है। लोगों को अपना उपचार कराने के लिए पलवल जाना पड़ता है, जो करीब 15 किलोमीटर दूरी पर है। सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं को होती है।
अस्पताल के शुभारंभ के लिए कई बार स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा गया है। मामले को लेकर स्थानीय विधायक दीपक मंगला व सांसद कृष्णपाल गुर्जर से भी अस्पताल शुरू करने की अपील की गई है।
मोनिका, ग्राम सरपंच बड़ौली
लोक निर्माण विभाग ने अस्पताल भवन को स्वास्थ्य विभाग को सौंप दिया है। कोरोना के कारण स्टाफ की नियुक्ति नहीं हो पा रही है। जल्द ही अस्पताल को शुरू कर लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा दी जाएगी।
डॉ.ब्रह्मदीप सिंह, जिला सिविल सर्जन पलवल