संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये करने की मांग को लेकर आशा कार्यकर्ताओं की हड़ताल सातवें दिन सोमवार को भी जारी रहा। यूनियन नेता गीता देवी की अध्यक्षता में कार्यकर्ताओं ने जिला नागरिक अस्पताल में धरना प्रदर्शन किया। धरने का संचालन जगबती ने किया। इस दौरान सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सामान्य नागरिक अस्पताल में धरना स्थल पर ध्वजारोहण किया जाएगा।
इस दौरान जिला प्रधान रामरति चौहान, सरोज व सीआईटीयू के नेता रमेश चंद ने कहा कि प्रदेश की 20 हजार आशा कार्यकर्ता सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने, ईपीएफ व ईएसआई का लाभ देने, रिटायरमेंट की उम्र 65 वर्ष करने, सभी सामाजिक सुरक्षा के लाभ देने, ऑनलाइन काम न कराने की मांग को लेकर बीती आठ अगस्त से हड़ताल पर हैं। विभाग के अधिकारियों द्वारा बार-बार आश्वासन देने पर भी अभी तक कोई समाधान नहीं किया जा रहा है। यदि समय रहते मांगें पूरी नहीं की गई तो प्रदेश की आशा कार्यकर्ता अनिश्चितकालीन हड़ताल पर भी जा सकती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बेटियों की बात सुनने कि बजाय उन्हें गिरफ्तार करके थानों में बिठा रही है। आशा सरकारी दमन के सामने नहीं झुकेंगी। सरकार द्वारा हाल ही में दिए गए डाटा के मुताबिक आशा कार्यकर्ता को रोज़ाना औसतन 300 रुपये मानदेय दिया जाता है, उसको हासिल करने के लिए अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ते हैं। इतने कम मानदेय में कोई व्यक्ति अपने परिवार का पेट कैसे भर सकता है। इसके बावजूद विभाग द्वारा रोज़ाना कोई न कोई तुगलकी फरमान जारी करके आशाओं का मानसिक शोषण करता है।
इस अवसर पर पूर्व सचिव भागीरथ बेनीवाल, यूनियन नेता ममता, कुसुम, रोशनी, बाला, राज पांचाल, सुनीता, राजरानी, रिंकी, पुष्पा ने भी अपने विचार रखे।