पलवल। अरै छोरा हुक्का ना भर रखो का, ना बाबा हुक्का से कोरोना फैल रहा है। इसलिए अब बतारी में आने वालों के लिए बीडी-सिगरेट का इंतजाम कर दिया है। हुक्का उठाकर घर के अंदर रख दिया है। कोरोना महामारी के दौरान हुक्का पीना पूरी तरह से बंद कर दिया है। अरै कहीं हुक्का तै कोरोना ना फैले, तुम नए बालक भी बेकार की बात करौ हो। बाबा, ये बेकार की बात नहीं है, हुक्का से कोरोना गांवों में बहुत फैल रहा है। यह संवाद गांव घुघेरा में एक बतारी के दौरान एक बुजुर्ग द्वारा हुक्का पीने की इच्छा जताने पर सुनाई दिए।
हुक्का से कोरोना संक्रमण फैलने की चर्चाओं ने अब ग्रामीणों में डर बैठा दिया है। जहां कुछ दिन पहले तक चौपालों, सामाजिक कार्यक्रमों व किसी की मौत के बाद जताए जा रहे शोक स्थल पर हुक्का गुड़गुड़ाने की आवाजे सुनाई देती थीं, वहीं स्वास्थ्य विभाग द्वारा हुक्का पीने से कोरोना फैलने की दी गई चेतावनी से गांवों से हुक्का गायब होने लगे हैं। लोगों ने अपनी बैठकों वा चौपालों से हुक्का उठाकर घरों के अंदर रख दिए हैं। इतना ही नहीं सामाजिक कार्यक्रमों व शोक स्थलों पर भी हुक्का दिखाई नहीं दे रहा है। हुक्का पीने के शौकीन घरों में अंदर ही अकेले हुक्का गुड़गुड़ा लेते हैं, लेकिन सार्वजनिक तौर पर कई-कई लोग मिलकर अब हुक्का पीते नहीं दिखाई देते हैं।
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किसानों के धरने पर से भी हटाया हुक्का
पलवल में कृषि कानूनों के विरोध में अटोहां मोड़ पर पिछले छह माह से चल रहे किसानों के धरना स्थल से भी किसानों द्वारा हुक्का उठा लिया गया है। अब किसान भी हुक्का के बजाय बीडी-सिगरेट पीते नजर आ रहे हैं। किसानों का कहना है कि कोरोना संक्रमण रोग को देखते हुए ऐसा निर्णय लिया गया है। किसान नेता महेंद्र चौहान ने बताया कि धरने पर आने वाले किसानों के स्वास्थ्य व जीवन का ख्याल रखना जरूरी है।
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गांव घुघेरा निवासी व जजपा नेता भगत सिंह घुघेरा तथा पंचायत समिति के सदस्य राज कुमार ओलिहान ने बताया कि उनकी दादी के निधन पर शोक व्यक्त करने वाले लोगों के लिए हुक्का रखने की बात हुई थी, लेकिन कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए हुक्का नहीं रखा गया है। हमने निर्णय लिया है कि कोरोना महामारी जब तक रहेगी, तब तक न तो किसी सामाजिक कार्यक्रम में हुुक्का पीने को रखा जाएगा और न ही चौपाल व बैठक पर।
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हुक्का बेहद खतरनाक है। हुक्का पर एक साथ कई-कई लोग बैठ जाते हैं तथा सभी का मुंह हुक्का से लगता है। ऐसे में कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा ज्यादा रहता है। डब्ल्यूएचओ ने भी इसके लिए गाइड लाइन जारी की थी। जिसके आधार पर हम गांवों में जाकर ग्रामीणों को जागरूक कर रहे हैं कि हुक्का न पीएं। जिसका असर पलवल जिले में देखने को मिल रहा है। लोग अब एक जुट होकर हुक्का पीने से बच रहे हैं। चौपालों व बैठकों तथा सामाजिक कार्यक्रमों के साथ-साथ शोक कार्यक्रमों में भी हुक्का अब दिखाई नहीं दे रहा है।
-लाल सिंह तेवतिया, सदस्य पंचायत समिति व पैनल अधिवक्ता जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण