पलवल। आंगनबाड़ी वर्कर एंड हैल्पर यूनियन की हड़ताल के 63वें दिन मंगलवार को कार्यकर्ताओं ने शहर में जुलूस निकालकर विरोध जताया। कार्यकर्ता ब्राह्मण धर्मशाला में एकत्रित हुई और सभा की। सभा के बाद विधायक दीपक मंगला के निवास तक जुलूस निकाला गया। कार्यकर्ता ब्राह्मण धर्मशाला से मीनार गेट, कमेटी चौक होते हुए विधायक के निवास तक पहुंची। इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन की अध्यक्षता जिला प्रधान उर्मिला रावत ने की, जबकि संचालन उप प्रधान कमला ने किया।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सीटू के जिला प्रधान श्रीपाल भाटी ने कहा कि हरियाणा सरकार को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के बारे में वर्ष 2018 की घोषणा लागू करनी पड़ेंगी। उन्होंने कहा कि सरकार कार्यकर्ताओं के साथ दुश्मनों जैसा व्यवहार कर रही है। प्रदेश की 40 हजार के करीब महिलाएं सड़कों पर हैं। उर्मिला रावत ने कहा कि आइसीडीएस के तहत लाभार्थी तबकों जिनमें 0-6 साल के बच्चे, गर्भवती और दूध पिलाने वाली महिलाओं को दिया जा रही पोषण सामग्री बंद है। स्वास्थ्य व अन्य योजनाएं बुरे तरीके से प्रभावित हैं। सरकार ऐसे हालात में भी संवेदनहीन रवैया अपना रही है। आंदोलन को दमन व उत्पीड़न के तरीके से विफल करवाना चाहती है। सरकार के मंसूबे सफल नहीं होंगे।
उन्होंने कहा कि 14 फरवरी को करनाल में प्रदेश भर की कार्यकर्ता पहुंचेंगी और सरकार को करारा जवाब देंगी। सरकार आंदोलन को खत्म करने के लिए कार्यकर्ताओं को सेवा से बर्खास्त कर रही है तथा मुकदमे दर्ज कर रही है। यह सरकार की बौखलाहट को ही दर्शाता है। इस प्रकार की कार्रवाई से आंदोलन कमजोर होने की बजाय और ज्यादा मजबूत होगा। कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर प्रचार करेंगी और सरकार के पुतले जलाएंगी। नौ फरवरी को हथीन के विधायक का घेराव किया जाएगा। उनसे जवाब मांगा जाएगा। प्रदर्शन को सीआईटीयू के जिला सचिव भागीरथ बैनीवाल, शशि, मकीना, माया, सीमा, पुष्पा, परसंदी, बिमलेश फौजदार, कुंमकुम, मंजू शर्मा ने भी संबोधित किया।
इन मांगों को लेकर चल रही हड़ताल
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बताया कि प्रधानमंत्री ने सितंबर 2018 में मानदेय में कार्यकर्ता के 1500 और सहायक के 750 रुपये की बढ़ोतरी की घोषणा की थी। पिछले चार साल से केंद्र सरकार से यह पैसा हरियाणा सरकार ले रही है। उसे कार्यकर्ताओं को नहीं दिया जा रहा है। राज्य के मुख्यमंत्री ने स्वयं छह मार्च 2018 को विधानसभा में घोषणा की थी कि कार्यकर्ताओं को अर्धकुशल-अकुशल की श्रेणी का मानदेय मिलेगा व इसे महंगाई भत्ता के साथ जोड़ा जाएगा। सरकार ने दो किस्त महंगाई भत्ते की भी 2019 में जोड़ी थी, लेकिन अब राज्य सरकार इस निर्णय से पीछे हट रही है।