शिकायत के तीन माह बाद भी बदस्तूर जारी निर्माण कार्य, प्रशासन गहरी नींद में
दिनेश देशवाल
नूंह। नूंह जिले के राजकीय महाविद्यालय नगीना में करीब आठ करोड़ रुपये की लागत से बन रही नई इमारत को लेकर गंभीर अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय निवासी द्वारा की गई शिकायत के महीनों बीत जाने के बाद भी जांच प्रक्रिया में ढिलाई और लीपापोती के आरोपों ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला खड़ा किया है। आरोप है कि निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का उपयोग कर न केवल सरकारी धन की हानि की जा रही है, बल्कि भवन की गुणवत्ता और सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ हो रहा है।
नगीना निवासी गणेशीराम पुत्र भगवानदास ने 22 जनवरी को सीएम विंडो के माध्यम से मुख्यमंत्री को शिकायत भेजकर निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि ठेकेदार द्वारा बेहद निम्न गुणवत्ता की ईंट, बजरी और सीमेंट का इस्तेमाल किया जा रहा है। साथ ही भवन के कॉलम भी टेढ़े-मेढ़े खड़े किए गए हैं, जिससे इमारत की मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस प्रकार का निर्माण भविष्य में किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
शिकायत के बाद 25 फरवरी को उच्चतर शिक्षा विभाग हरियाणा के महानिदेशक कार्यालय से महाविद्यालय के प्राचार्य को पत्र जारी कर मामले की जांच कर रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए। इसके तहत प्राचार्य ने 28 फरवरी को लोक निर्माण विभाग के कार्यकारी अभियंता को पत्र लिखकर तीन दिन के भीतर जांच रिपोर्ट देने को कहा, हालांकि निर्धारित समय में कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद 17 मार्च और 9 अप्रैल को क्रमशः पहला और दूसरा रिमाइंडर भेजा गया।
लगातार अनुस्मारक भेजने के बाद 10 अप्रैल को पीडब्ल्यूडी के कार्यकारी अभियंता ने मौके का निरीक्षण तो किया, लेकिन आरोप है कि न तो निर्माण सामग्री के नमूने लिए गए और न ही विभाग को कोई ठोस जांच रिपोर्ट सौंपी गई। इस स्थिति से नाराज प्राचार्य ने उच्चतर शिक्षा विभाग को मौखिक रूप से अवगत कराया कि पीडब्ल्यूडी विभाग इस मामले में गंभीरता नहीं दिखा रहा है और ठेकेदार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्चतर शिक्षा विभाग के महानिदेशक ने 28 अप्रैल को नूंह के उपायुक्त को पत्र लिखकर अपने स्तर पर एक जांच समिति गठित करने और निर्माण कार्य में उपयोग की गई सामग्री की जांच कर 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए। लेकिन, पत्र जारी होने के एक सप्ताह बाद भी न तो कोई समिति गठित की गई और न ही जांच प्रक्रिया शुरू हुई है। इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शिकायतकर्ता गणेशीराम का आरोप है कि विभागीय लापरवाही का फायदा उठाकर ठेकेदार तेजी से प्लास्टर और अन्य कार्य कर रहा है, ताकि संभावित जांच को प्रभावित किया जा सके और निर्माण की वास्तविक स्थिति छिपाई जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि बुधवार को उन्होंने इस संबंध में नूंह के उपायुक्त अखिल पिलानी को पुनः शिकायत सौंपी है और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
वहीं, उपायुक्त अखिल पिलानी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि शिकायत प्राप्त हो गई है और जल्द ही इसकी जांच करवाई जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता या गड़बड़ी पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।