संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। नूंह में 31 जुलाई 2023 को हुए दंगे के करीब 6 महीने बाद तीन एफआईआर में लगी गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम-1967 ( यूएपीए ) की धारा के बाद अब सभी आरोपी व उनके वकील जिला सत्र न्यायालय में इसे चैलेंज करने की तैयारी कर रहे हैं।
इसके लिए साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। अभी इनमें से अधिकांश आरोपी बाहर हैं। साथ ही इस पूरे मामले की न्यायिक जांच करने की मांग भी उठने लगी है। आरोपी पक्ष के वकील ताहिर हुसैन रुपड़िया का कहना है कि अभी उनके मुव्वकिल को कोई नोटिस या अन्य दस्तावेज नहीं मिला है ।,लेकिन धाराएं जुड़ चुकी हंै। जो गलत हैं इसके लिए वह साक्ष्य इकट्ठा कर जिला सत्र न्यायालय में चुनौती देने की तैयारी है। जैसे-जैसे मामलों में तारीख आती रहेगी वैसे ही उसमें साक्ष्य व जिरह की जाएगी। नगीना थाना में दर्ज एफआईआर नंबर 149 में भी यूएपीए की धारा जोड़ी गई है। खास बात इस मुकदमे में फिरोजपुर झिरका से कांग्रेस के विधायक मामन खान सहित हिंसा के 43 आरोपी शामिल हैं, जो सभी जमानत पर बाहर हैं। नूंह हिंसा के आरोपी विधायक मामन खान के अधिवक्ता ताहिर हुसैन रुपडिया का कहना है कि इन सभी केसों में यूएपीए की धारा का कोई आधार नहीं बनता। ऐसी धाराएं देश विरोधी गतिविधियों से जुड़े संगठन या व्यक्ति विशेष पर लगाई जाती हैं, लेकिन नूंह हिंसा में आरोपियों का कोई ऐसा बैकग्राउंड नहीं था, जो किसी संदिग्ध संस्था से जुड़ा हो। यह धाराएं कानून के खिलाफ लगाई गई हैं। इसके खिलाफ वह लड़ाई लड़ेंगे।
क्या है यूएपीए : यूएपीए मतलब गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम-1967 है। इस कानून का मुख्य काम आतंकी गतिविधियों को रोकना होता है। इस कानून के तहत पुलिस ऐसे आतंकियों, अपराधियों या अन्य लोगों को चिन्हित करती है, जो आतंकी गतिविधियों में शामिल होते हैं। इसके लिए लोगों को तैयार करते हैं या फिर ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं। इस मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को काफी शक्तियां होती हैं। यहां तक की (एनआईए) महानिदेशक चाहे तो किसी मामले की जांच के दौरान वह संबंधित शख्स की संपत्ति की कुर्की-जब्ती भी करवा सकते हैं।