पलवल। बघौला में एनएच–19 पर बन रहे फ्लाईओवर के निर्माण कार्य के कारण लगातार लग रहे ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने के जिला प्रशासन के दावे पहली ही बारिश में फेल हो गए। प्रशासन द्वारा तैयार कराए गए वैकल्पिक मार्ग की हकीकत मूसलाधार बारिश ने सामने ला दी। बारिश के बाद पलवल से बल्लभगढ़ और बल्लभगढ़ से पलवल आने-जाने वाले यात्रियों को दो-दो घंटे तक भीषण जाम में फंसे रहना पड़ा। जाम की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक सात महीने का नवजात भी अपनी मां के साथ दो घंटे तक जाम में फंसा रहा। कई एंबुलेंस और अन्य वाहन भी जाम में फंसे रहे।
थाना यातायात प्रभारी निरीक्षक जगवीर सिंह ने बताया कि एनएच–19 पर बघौला में फ्लाईओवर निर्माण के कारण डायवर्जन प्वाइंट पर ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए वैकल्पिक मार्ग तैयार किया गया था। वैकल्पिक मार्ग से लोगों को जाम से राहत मिलने की उम्मीद थी लेकिन पहली ही बारिश में यह मार्ग बंद हो गया, जिससे प्रशासन का दावा धराशायी हो गया।
स्थानीय लोगों और यात्रियों का कहना है कि वैकल्पिक रूट केवल दिखावे के लिए बनाया गया था। बारिश में कीचड़ और जलभराव के कारण यह पूरी तरह असुरक्षित साबित हुआ। नतीजतन, बघौला चौराहे और आसपास के डायवर्जन प्वाइंट्स पर वाहनों की लंबी कतारें लगीं और जाम सामान्य स्थिति बन गया।
फ्लाईओवर परियोजना का करीब 75 फीसदी कार्य पूरा हो चुका है। ट्रैफिक दबाव को देखते हुए जिला प्रशासन और एनएचएआई ने फ्लाईओवर की एक लेन को वैकल्पिक रूप से खोल दिया था, जिससे कुछ हद तक लोगों को राहत मिली। दिसंबर 2025 तक फ्लाईओवर पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा। तब तक ट्रैफिक एक लेन से नियंत्रित किया जाएगा।
बारिश के कारण बने हालात और जाम ने प्रशासन के दावों पर सवाल खड़े कर दिए। मूसलाधार बारिश के बाद वैकल्पिक मार्ग बंद हो गया। जाम में न केवल आम यात्री बल्कि एंबुलेंस, आपूर्ति वाहन और बसें भी फंसी रहीं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, कई बार ऐसे हालात बनते हैं जब बीमार व्यक्ति समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाता, जिससे जान का खतरा बन जाता है।
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जब तक फ्लाईओवर पूरी तरह चालू नहीं होता, तब तक पुख्ता वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। सड़कों की समतलीकरण, जल निकासी और कीचड़ हटाने के पुख्ता इंतजाम किए जाएं, ताकि बारिश के दौरान लोगों को राहत मिल सके।