काम के लिए लोगों को बार-बार लगाने पड़ रहे सरकारी कार्यालयों के चक्कर
रिजवान खान
नूंह। जिले में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अवैध खनन पर लगाम लगाने के सरकारी दावों के बीच अधिकारियों के खाली पद व्यवस्था की राह में बड़ी बाधा बने हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग के उपकेंद्रों से लेकर खनन और शिक्षा विभाग तक, स्थायी अधिकारियों की कमी का असर कामकाज पर पड़ रहा है। कहीं ग्रामीणों को सामान्य स्वास्थ्य जांच के लिए दूसरे केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है तो कहीं लोगों को अपने काम के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि जिले के पांचों खंडों में खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) के पद खाली हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग के 111 उपकेंद्रों में से 37 पर सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) तैनात नहीं हैं।
111 उपकेंद्रों में से 37 पर सीएचओ नहीं
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिले में ग्रामीणों को गांव स्तर पर प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए 111 स्वास्थ्य उपकेंद्र संचालित हैं। नियमानुसार, प्रत्येक उपकेंद्र पर एक सीएचओ की तैनाती होनी चाहिए, जो केंद्र का प्रभारी होता है और ग्रामीणों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके बावजूद जिले के केवल 74 उपकेंद्रों पर ही सीएचओ तैनात हैं, जबकि 37 उपकेंद्रों में ये पद खाली पड़े हैं। रिठट, मोहम्मदपुर तेड़, औथा, निजामपुर, बुबलहेड़ी और लुहिंगा कलां सहित दर्जनों गांवों में सीएचओ के पद रिक्त होने से नियमित स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। ग्रामीणों के अनुसार, इन केंद्रों पर सीएचओ की नियमित मौजूदगी नहीं होने के कारण सामान्य स्वास्थ्य जांच, रक्तचाप और मधुमेह की जांच, गर्भवती महिलाओं की निगरानी तथा स्वास्थ्य परामर्श जैसी सुविधाओं के लिए दूसरे केंद्रों पर जाना पड़ता है। इससे ग्रामीणों का समय और पैसा, दोनों खर्च होते हैं। गांवों में ही स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना का उद्देश्य भी प्रभावित हो रहा है।
खनन अधिकारी नहीं, अवैध खनन पर निगरानी को लेकर सवाल
जिले को अवैध खनन के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। इसके बावजूद खनन अधिकारी का स्थायी पद एक महीने से अधिक समय से खाली है। फिलहाल चंडीगढ़ में कार्यरत एक खनन अधिकारी को जिले का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है, जो सप्ताह में कभी-कभार ही आते हैं। स्थायी अधिकारी की अनुपस्थिति में खनन संबंधी कामकाज प्रभावित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। खनन की अनुमति लेने के लिए लोगों को कई-कई बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। वहीं, जिले में अवैध खनन की गतिविधियां दोबारा जोर पकड़ने की बात भी सामने आ रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि संवेदनशील जिले में खनन गतिविधियों की निगरानी और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त प्रशासनिक व्यवस्था कैसे बनाए रखी जा रही है।
पांचों खंडों में बीईओ के पद खाली
शिक्षा विभाग में भी अधिकारियों की कमी चिंता का विषय बनी हुई है। जिले में पांच खंड शिक्षा अधिकारियों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन सभी पद खाली पड़े हैं। स्थायी बीईओ नहीं होने के कारण स्कूलों के प्रिंसिपलों को अतिरिक्त प्रभार सौंपकर काम चलाया जा रहा है। ये पद कई वर्षों से खाली बताए जा रहे हैं। खंड शिक्षा अधिकारी स्कूलों की निगरानी, शैक्षणिक व्यवस्था की समीक्षा और विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में सभी पांच पद खाली होने से विभागीय कामकाज और स्कूलों की नियमित निगरानी पर असर पड़ने की आशंका है। जिला शिक्षा अधिकारी राजेंद्र शर्मा ने बताया कि खाली पदों को भरने के लिए कई बार उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर अवगत कराया गया है, लेकिन अभी तक स्थायी खंड शिक्षा अधिकारियों की नियुक्ति नहीं हो पाई है।
स्वास्थ्य, खनन और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों में अधिकारियों की कमी से जिले की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक ओर लोगों को बेहतर सुविधाएं देने की बात कही जाती है, वहीं दूसरी ओर स्वीकृत पद खाली रहने से योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी में बाधाएं आ रही हैं। अब जरूरत केवल खाली पदों की जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने की नहीं, बल्कि समयबद्ध तरीके से नियुक्तियां करने की है, ताकि ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भटकना न पड़े, खनन गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी हो और स्कूलों की व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके।
कोट
माइनिंग अधिकारी को अस्थायी चार्ज दिया हुआ है। संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों को जल्द जिले में स्थायी अधिकारी नियुक्त करने के लिए लिखा जाएगा। शिक्षा व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के लिए भी जल्द समाधान निकाला जाएगा। - अखिल पिलानी, जिला उपायुक्त