होडल। गांव शेषसाई के प्राचीन भगवान लक्ष्मीनारायण के मंदिर में बृहस्पतिवार को आंवला एकादशी पर श्रद्धालुओं की खासी भीड़ उमडी। पूरे दिन पूजा-अर्चना का दौर चलता रहा। मेले के आयोजन को लेकर मंदिर प्रांगण को फूल मालाओं से भव्य तरीके से सजाया गया। था, वहीं मंदिर के बाहर पूरे दिन बाजार में भी खासी रौनक रही। दूसरी ओर पुलिस प्रशासन ने भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रखे।
होली से पहले पड़ने वाली इस एकादशी के अवसर पर श्रद्धालु भगवान लक्ष्मीनारायण के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। सुबह होने वाली मंगला आरती में हिस्सा लेने के लिए चार बजे से ही तांता लगना शुरू हो जाता है। श्रद्धालुओं ने यहां बने क्षीरसागर में हाथ, मुंह धोकर व स्नान कर भगवान के दर्शन किए और परिक्रमा कर मन्नत मांगी। इस अवसर पर मंदिर प्रांगण में भजन संकीर्तन का आयोजन किया गया, जिसमें होली के फाग और धार्मिक भजन प्रस्तुत किए गए।
पुजारी कन्हैयालाल गोस्वामी के अनुसार मंदिर लगभग साढ़े आठ सौ वर्ष पुराना है। गांव खिरबी के राघौ व रामदास नामक दो भाई भगवान जगन्नाथ के परम भक्त थे। दोनों ने उनके दर्शन के लिए डंडवत परिक्रमा की। भगवान उनकी श्रद्धा से काफी प्रसन्न हुए और उनके सपने में कहा कि गांव के निकट क्षीरसागर के निकट कदम का एक पेड़ है। जिसके नीचे गऊ अपने थनों से दूध डाले, उसी के नीचे मेरे स्वरूप की प्रतिमा निकलेगी। आज्ञानुसार दोनों भाई लौट आए और कदम के पेड़ की तलाश शुरू की। एक कदम के पेड़ के नीचे गाय ने थनों से दूध डाला और दोनों ने उसी जगह खुदाई शुरू कर दी। जिसमें भगवान लक्ष्मीनारायण की प्रतिमा निकली। वे रोज क्षीरसागर के जल से भगवान श्री लक्ष्मीनारायण की प्रतिमा का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना करते।