गुड़गांव/नूंह। शनिवार की अलसुबह झमाझम बारिश ने दोनों शहरों को भिगो कर रख दिया। इससे जहां जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया। वहीं खेतों में पानी जमा हो गया। गेहूं की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। मौसम विभाग नेे अगले चौबीस घंटे तक बरसात जारी रहने की आशंका व्यक्त की है। ऐसे में किसानों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
मेवात और गुड़गांव में शनिवार की सुबह छह एमएम बारिश दर्ज की गई। शुक्रवार को मौसम दिनभर पूरी तरह साफ था। फिर आधी रात को दो बजे अचानक बादलों की गड़गड़ाहट के बीच तेज बारिश शुरू हो गई। सुबह दस बजे तक कभी तेज तो कभी रिमझिम बारिश होती रही। सुबह 11 बजे के बाद कुछ समय के लिए धूप भी निकली, लेकिन फिर से आसमान पर बादल छा गए। दिन भर सर्द हवाएं चलीं। इससे जलभराव, जाम और बिजली कट जैसी दिक्कतें होने लगीं।
छह डिग्री नीचे गिरा पारा
मौसम में बदलाव से तापमान में करीब छह डिग्री की गिरावट आई। दिन में जहां अधिकतम तापमान 20 डिग्री दर्ज हुआ, वहीं न्यूनतम तापमान 15 डिग्री के आसपास रहा। सर्द हवा की रफ्तार छह से दस किलोमीटर प्रति घंटा रही। मौसम विभाग का कहना है कि फरवरी में अब तक सामान्य से 270 फीसदी अधिक बारिश हो चुकी है।
किसान की बढ़ी चिंता
वसंत के मौसम में बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। फरवरी में होने वाली बरसात को गेहूं के लिए वरदान माना जाता है। लेकिन जरूरत से अधिक बारिश से अब इस पर खतरा मंडराने लगा है। कृषि वैज्ञानिक राकेश सिंह बताते हैं कि इस समय गेहूं की फसल में पानी जमा होने से जड़ नष्ट हो जाएगी। अगर गेहूं की बाली निकलने के बाद पानी बरसता है तो फसल के पीला पड़ जाने की आशंका थी। अभी बाली नहीं निकली, इसलिए फसल के पीला पड़ने को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है।
मेवात में पानी निकासी को जगह नहीं
कृषि वैज्ञानिक भले ही खेतों से पानी निकालने की सलाह दे रहे हैं, लेकिन मेवात का इलाका इतना नीचा है कि पानी निकासी हो ही नहीं पाती। यहां के गांव जयसिंहपुर, नौशेरा, उजीना, अलालपुर, उमरा, उमरी समेत तमाम गांवों के खेतों में एक से डेढ़ फुट पानी जमा है। गांव जयसिंहपुर के सरपंच मोहम्मद उस्मान ने बताया कि करीब 700 एकड़ फसल पानी में डूबी हुई है। यह इलाका झील में पड़ता है। किसानों ने जिला उपायुक्त मेवात विनय सिंह यादव से भी पानी निकासी के उपाय सुनिश्चित करने की अपील की है।