जिले में स्वीकृत 9,831 पदों में से 5,147 पर कार्यरत हैं शिक्षक
901 सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत 2,54,034 विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा असर
फोटो: मेवात के एक स्कूल में बिना शिक्षक के विद्यालय में पढ़ते बच्चे।
901 स्कूलों में 2.54 लाख से अधिक विद्यार्थी
दिनेश देशवाल
नूंह। नूंह जिले की सरकारी शिक्षा व्यवस्था अब भी गंभीर शिक्षक संकट से जूझ रही है। शिक्षा विभाग के अद्यतन आंकड़ों के अनुसार जिले के सरकारी स्कूलों में स्वीकृत 9,831 शिक्षकीय पदों में से 5,147 पर शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि 4,684 पद रिक्त हैं। यानी लगभग 48 प्रतिशत पद खाली हैं। इसका सीधा असर जिले के 901 सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत 2,54,034 विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। स्थिति यह है कि जिले के 82 स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं, जबकि 37 स्कूलों में नियमित शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं।
हालांकि, हाल ही में हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) की ओर से मेवात कैडर के 1,456 जेबीटी शिक्षकों का परिणाम घोषित किया गया था। इनमें से करीब 1,200 शिक्षकों ने कार्यभार ग्रहण कर लिया है, जिससे प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
प्राथमिक विद्यालयों में 75:1 है शिक्षक-छात्र अनुपात
जिले में संचालित 901 सरकारी स्कूलों में 504 प्राथमिक, 261 मिडिल तथा 136 हाई एवं वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं। इनमें प्राथमिक विद्यालयों में 1,38,026, मिडिल स्कूलों में 80,898 तथा हाई एवं वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में 35,110 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
सबसे गंभीर स्थिति प्राथमिक विद्यालयों की है, जहां शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात (पीटीआर) 75:1 है, जबकि निर्धारित मानक 30:1 है। मिडिल स्कूलों में यह अनुपात 37:1, हाई एवं वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में 29:1 तथा जिले का औसत 49:1 है।
पदवार स्थिति देखें तो जेबीटी के 3,898 स्वीकृत पदों में से करीब 2,900 शिक्षक कार्यरत हैं और करीब एक हजार पद रिक्त हैं। टीजीटी के 3,335 पदों में 2,029 कार्यरत तथा 1,374 पद खाली हैं। पीजीटी के 1,886 पदों में 1,114 शिक्षक कार्यरत हैं और 772 पद रिक्त हैं। इसके अलावा 380 हेड टीचर पदों में 251, 127 प्राचार्य पदों में 26 तथा 198 ईएसएचएम पदों में 60 पद खाली हैं। वर्तमान में जिले में 3,579 नियमित शिक्षक, 916 गेस्ट टीचर, 531 एचकेआरएनएल कर्मचारी और 465 शिक्षा सहायक कार्यरत हैं।
37 स्कूलों में नियमित शिक्षक नहीं
एकल शिक्षक स्कूलों की संख्या भी चिंता का विषय बनी हुई है। इनमें 22 स्कूल फिरोजपुर झिरका, 20 पुन्हाना, 18 नागिना, 13 तावड़ू तथा 9 नूंह खंड में हैं। वहीं, 37 स्कूलों में नियमित शिक्षक नहीं हैं, जिनमें 16 फिरोजपुर झिरका, 8 पुन्हाना, 7 नागिना, 5 नूंह और 1 तावड़ू में स्थित है।
प्रशासनिक स्तर पर भी स्टाफ की कमी बनी हुई है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में 599 चतुर्थ श्रेणी पदों में 263 तथा 279 क्लर्क पदों में 90 पद रिक्त हैं। जिला मौलिख शिक्षा अधिकारी, पांचों खंड शिक्षा अधिकारियों के पद अतिरिक्त प्रभार पर संचालित हो रहे हैं और कई प्रशासनिक पद भी खाली हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी संख्या में रिक्त पदों के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई, परीक्षा परिणाम, नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
कोट
नई नियुक्तियों में से 1179 अध्यापक जिले में आए हैं, जिनके ऑनलाइन स्टेशन देने की प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी। उम्मीद है कि सभी स्कूलों में अध्यापकों की तैनाती होगी तथा जिले का एक भी स्कूल अब बिना अध्यापक के नहीं रहेगा। अन्य शिक्षकों की कमी को लेकर भी सरकार व उच्चाधिकारियों को लगातार अवगत कराया जा रहा है। -राजेंद्र शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी, नूंह