बरसात से ईंट भट्ठा मालिकों को लगा झटका
- खेत में रखी कच्ची ईंटें बरसात का पानी भरने से टूटकर हुईं खराब, करोड़ों रुपये का नुकसान
अमर उजाला ब्यूरो
पलवल। जिले में स्थित ईंट भट्ठा मालिकों को सोमवार व मंगलवार को हुई बरसात की भारी मार झेलनी पड़ रही है। बरसात के कारण जिले के भट्ठा मालिकों को एक करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। इससे भट्टा मालिकों को आगे की चिंता सताने लगी है। अभी वे एनजीटी द्वारा जिग जैग तकनीकी में लगाए 25 से 30 लाख रुपये की लागत वसूल नहीं कर पाए थे कि दो दिन की बरसात ने ही एक भट्टा मालिक को कम से कम 15 से 20 लाख रुपये का झटका दे दिया है। बरसात से हुए नुकसान व जिग जैग तकनीकी अपनाने के कारण इस बार ईंटें और भी महंगी होने के आसार बन गए हैं।
जिले में करीब 125 ईंट भट्टे हैं। हर साल दिसंबर व जनवरी में भट्टों में आग छोड़ी जाती है तथा दो माह से तैयार की जा रही कच्ची ईंटों को पकाया जाता है। इस बार भी एक भट्ठे पर कम से कम 10 लाख ईंट कच्ची तैयार थीं, जिन्हें आग छोड़ने के बाद पकाया जाना था तथा उसके बाद बाजार में बिकने के लिए भेजा जाता। भट्ठा मालिकों ने आग छोड़ने के लिए बाहर से मजदूर भी मंगवा लिए तथा एक-दो दिन में आग छोड़ी जानी थी, लेकिन सोमवार को जिले में अचानक बरसात शुरू हो गई और पलवल में 18, होडल व हसनपुर में 13-13 एमएम तथा हथीन में 11 एमएम बरसात हुई। इस बरसात से खेतों में भी पानी भर गया तथा जहां भट्ठा मालिकों ने किसानों से खेत पट्टे पर लेकर मिट्टी खुदाई के बाद कच्ची ईंटें तैयार कराई थीं, वहां इतना पानी भर गया है कि कच्ची ईंटें पूरी तरह से खराब हो गई हैं।
आल इंडिया ईंट भट्ठा एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष स्वतंत्र गोयल ने बताया कि बरसात से एक भट्ठा मालिक को जिले में करीब 15 से 20 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। एक भट्टे पर 10 से 15 लाख ईंट कच्ची बनाई हुई थीं, जिन्हें चिमनी में आग छोड़ने के बाद पकाया जाना था। बरसात ने काफी नुकसान किया है। बाहर से मंगवाए गए मजदूर भी फिलहाल खाली बैठे हैं, क्योंकि अब 15 दिन से पहले चिमनी नहीं चल पाएगी। उन्होंने बताया कि इस बार पहले एनजीटी ने 25 से 30 लाख रुपये हर भट्टे पर जिग जैग वाली नई तकनीकी पर लगवा दिए और अब मौसम ने मार दे दी है। इस नुकसान की भरपाई करना बेहद मुश्किल है।