सत्ताधारी भाजपा का गढ़ माना जाने वाले जीटी बेल्ट में आने वाले क्षेत्र पंचकूला, यमुनानगर, करनाल, पानीपन, कैथल, कुरुक्षेत्र, अंबाला सहित 27 सीटें इसी इलाके में आते हैं। यहां पिछले चुनाव में औसत 66.40 मतदान के मुकाबले इस बार 67.70 प्रतिशत मतदान हुआ है। यह पिछले चुनाव के मुकाबले 1.30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
राज्य के दक्षिण हरियाणा में आने वाले जिले गुरुग्राम, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, नूंह, पलवल, फरीदाबाद समेत कुल 23 सीटें है, जिसमें भाजपा को 15 सीटें मिली थी। यहां पिछली बार चुनाव में 63.75 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि इस बार के चुनाव में बढ़कर 66 प्रतिशत मतदान हुआ है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का गढ़ माने जाने वाला जाटलैंड में अबकी बार 1.02 प्रतिशत मतदान कम हुआ है। इस क्षेत्र में रोहतक, पानीपत, झज्जर, जींद, भिवानी, चरखी दादरी के 25 सीटें आती हैं। यहां मतदान प्रतिशत उल्टा सामने आया है, पिछली बार 67.87 प्रतिशत मतदान वाले जाटलैंड क्षेत्र में अबकी बार 1.02 प्रतिशत कम यानी 66.85 प्रतिशत मतदान हुआ है।
पश्चिम हरियाणा वोटिंग के मामले में सबसे अव्वल रहा है। इस क्षेत्र में सिरसा, फतेहाबाद, हिसार जिले की 15 सीटें आती हैं। यहां पिछली बार चुनाव में 70 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि इस बार चुनाव में कुल 72.51 प्रतिशत मतदान हुआ है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सीट लाडवा हलके में 3 प्रतिशत से ज्यादा मतदान प्रतिशत गिरा है। जबकि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के गढ़ी-सापलां-किलोई सीट पर 5 प्रतिशत से ज्यादा मतदान प्रतिशत कम हुआ है। हरियाणा में 42 सीटों पर 70 प्रतिशत से ज्यादा और 7 सीटों पर 55 प्रतिशत मतदान हुआ है। सबसे ज्यादा लोहारु में 79.30 प्रतिशत मतदान और सबसे कम बड़खल में 47.29 प्रतिशत मतदान हुआ है।
शहरी मतदाता घर से बाहर कम निकला। ग्रामीण मतदाता की भी दिलचस्पी अपेक्षाकृत कम दिखी।
- टिकट वितरण के दौरान कांग्रेस व भाजपा में बगावत हुई। जिससे अनेक नाराज नेता दिखाने को माने लेकिन चुनाव में सक्रिय नहीं रहे।
- जनता से जुड़े मुद्दे इस बार चुनाव में कम रहे। राष्ट्रीय नेताओं और राष्ट्रीय मुद्दों के आस-पास चुनाव घूमा है।