किसानों ने हरियाणा के रेवाड़ी में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर किसानों की जमीन सरमायेदारों को देकर उन्हें प्रदेश से निकालने का प्रयास करने का आरोप लगाया है।
श्री लाल बहादुर शास्त्री किसान संघ के सदस्यों ने बताया कि गुजरात सरकार ने उन्हें बाहरी राज्यों का बताते हुए उनकी कृषि भूमि को फ्रीज कर दिया है। इस कारण किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
किसानों ने मुख्यमंत्री से फ्रीज की गई जमीनों को पहले की तरह मुक्त करने की मांग की है। ये किसान उक्त जमीन संबंधी केस की सुप्रीम कोर्ट में तारीख भुगतने उपरांत रेवाड़ी के रास्ते कच्छ-भुज जाने से पहले यहां रुके थे।
40-50 साल से कच्छ में रह रहे किसान सुंदर सिंह भुल्लर, भजन सिंह, कमल रेढू सहित 10-12 किसानों ने कहा कि संयुक्त पंजाब के किसानों ने 1965 की भारत-पाक युद्ध के बाद लखपत व अवादा गांवों में सरकारी रेट के अनुसार जमीन खरीदी थी। हरियाणा के किसानों ने 250 एकड़ जमीन खरीदी थी।
यहां 13 किसानों की जमीन का इंतकाल खारिज कर दिया था। 1965 में भूतपूर्व सैनिकों और किसानों को जो जमीन दी थी अक्तूबर 2010 में उन 956 किसानों के खाते सील कर दिए।
सरकार के आदेश के खिलाफ किसानों ने गुजरात उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिसमें न्यायालय ने गुजरात सरकार के आदेश को अवैध करार दे दिया। गुजरात सरकार ने उस आदेश के खिलाफ अपील की हुई है।