न्यूनतम वेतन वृद्धि की घोषणा के मुद्दे पर शहर की यूनियनें एवं औद्योगिक संगठन आमने-सामने आ गए हैं। उद्योगपति न्यूनतम वेतन 5342 रुपये से बढ़ाकर 8100 करने की घोषणा का विरोध कर ही रहे थे कि श्रमिक संगठनों ने एक कदम आगे बढ़कर इसे 15000 रुपये प्रतिमाह करने की मांग कर दी है।
इस मांग के पीछे हवाला महंगाई का दिया गया है। सोमवार शाम नीलम चौक स्थित हिंद मजदूर सभा के कार्यालय में संयुक्त ट्रेड यूनियन काउंसिल की बैठक हुई। इसमें यह निर्णय लिया गया कि 30 नवंबर को दोपहर 2:00 बजे बाटा कंपनी के सामने ग्राउंड में श्रमिक संगठनों का एक संयुक्त कन्वेंशन किया जाएगा। जिसमें न्यूनतम वेतन का मुद्दा प्रमुखता से उठेगा। इसमें उद्यमियों से सवाल किया जाएगा कि फरीदाबाद जैसे शहर में 5342 रुपये में कोई कैसे जीवन व्यतीत कर सकता है।
बैठक में बेचू गिरी, उधम सिंह, अशोक कुमार, इंद्रसेन शुक्ल, उमेश गुप्ता, निरंतर पाराशर, युद्धवीर खत्री, बलजीत सिंह, भोले सिंह, आनंद यादव, विजय झा एवं संजय गाबा सहित कई श्रमिक नेता मौजूद थे। इन नेताओं ने कहा कि प्रदेश में एक जनवरी से न्यूनतम वेतन 8100 रुपये घोषित किया गया है, यह महंगाई के वर्तमान स्तर को देखते हुए कम है। संयुक्त ट्रेड यूनियन काउंसिल इसे 15000 रुपये करने की मांग करती है। शहर में करीब तीन लाख श्रमिक न्यूनतम वेतन पर जीवन व्यतीत करते हैं। इस मौके पर श्रमिकों से 12 दिसंबर के संसद मार्च में शामिल होने की अपील की गई।