नारनौल। शहर से करीब चार किलोमीटर दूर नसीबपुर गांव स्थित जेठूबाबा मंदिर के जलाशय के घाट पर व्रती महिलाओं ने छठ पर अस्ताचगामी सूर्य को अर्घ्य देकर सुख-समृद्धि की कामना की।
शहर में रह रहे बिहार के करीब 20-25 परिवारों ने इस पर्व को श्रद्धा व आस्था के साथ मनाया। इस दौरान कांच ही बांस के बहंगिया बहंगी लचकत जाए, केरवा जे फरेला घवद से ओह पर सुग्गा मंडराय आदि छठ गीत गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने सोमवार को छठ पूजा उत्सव में अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
पर्व को लेकर पूर्वांचल वासियों ने घाट व मंदिर को लड़ियों व फूलों से सजाया था। यहां परिवार संग पर्व मनाने पहुंचे प्रधान अवधेश ठाकुर व सत्यनारायण ने बताया कि इस दिन नदी, तालाब में खड़े होकर व्रती डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं।
इसके पीछे मान्यता यह है कि डूबते समय सूर्यदेव अपनी दूसरी पत्नी प्रत्युषा के साथ होते हैं और इस समय सूर्य को अर्घ्य देने से जीवन में चल रहीं सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं। सौभाग्य में वृद्धि होती है।
उन्होंने बताया कि रविवार से छठ पर्व शुरू किया गया था। इस दौरान हमने अपने कुल देवता की पूजा अर्चना कर उन्हें फल व प्रसाद का भोग लगाया। उन्होंने बताया कि रविवार को व्रत के दौरान हम सबने भी एक समय फलाहार किया।
अब मंगलवार को सुबह उगते सूरज को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाएगा। यह व्रत दो दिन तक निर्जला रखा जाता है। इसे लेकर आचार्य क्रांति निर्मल ने बताया कि हिंदू धर्म में आस्था का महापर्व छठ का बहुत अधिक महत्व होता है।
छठ पूजा का पर्व मुख्यतः बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है। यह सूर्य देवता को समर्पित एक चतुर्दिवसीय व्रत है। छठ पूजा में सूर्य देवता को अर्घ्य देखकर संतान की दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना की जाती है।