महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेंवि) के शोधकर्ताओं ने मधुमेह के कारण होने वाले किडनी फेल (डायबिटिक नेफ्रोपैथी) को कम करने के लिए ऐश गार्ड यानी सफेद पेठा पर आधारित हर्बल फॉर्मूलेशन विकसित किया है। शोध का नेतृत्व हकेंवि के औषधि विज्ञान विभाग के प्रोफेसर व विभागाध्यक्ष डॉ. विपन परिहार ने किया।
यह शोध नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (नाइपर) हाजीपुर, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बीएचयू) वाराणसी, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च बहरमपुर और देहली फार्मास्युटिकल साइंसेज एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी के सहयोग से किया गया।
शोध में उनके साथ डीपीएसआरयू के कुलपति डॉ. वी. रविचंद्रन व आईआईएसईआर बरहमपुर की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रूथ्रोथा सेल्वी का विशेष योगदान रहा। शोध भारत के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय की ओर से वित्तपोषित है।
डॉ. विपन परिहार ने बताया कि हाजीपुर, वाराणसी, देहली, बहरमपुर आदि वर्ष 2023 से 25 तक शोध किया गया। इसमें लैब एनिमल पर शोध किया गया। इसमें पाया गया कि मधुमेह के प्रभाव से गुर्दे के वे जीन प्रभावित होते हैं जो इलेक्ट्रोलाइट संतुलन, जल-समस्थिति व अपशिष्ट निष्कासन को नियंत्रित करते हैं।
सफेद पेठा के फल व गूदे से तैयार विशेष फॉर्मूलेशन ने गुर्दा कार्यप्रणाली व रक्त शुद्धिकरण से जुड़े जीन व प्रोटीन की अभिव्यक्ति को बढ़ाया और इससे मधुमेह जनित किडनी फेल में काफी नजर आई।
कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने कहा कि आयुर्वेदिक ज्ञान को साक्ष्य-आधारित वैज्ञानिक पद्धति से जोड़ना समय की आवश्यकता है। यह शोध मधुमेह जनित नेफ्रोपैथी जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यूरिन फिल्टरेशन करता है सफेद पेठे का जूस
डॉ. विपन परिहार ने बताया वर्तमान में लोगों में किडनी फेल होने की बीमारी अधिक चल रही है। इसका मूल कारण किडनी यूरीन फिल्टरेशन का उचित न होना और मधुमेह के बढ़ने से किडनी सेल्स जल्दी ही खत्म होने लगती हैं। अगर नियमित रूप से सफेद पेठे का कच्चे रूप में सेवन किया जाए तो इसका सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है। पेठे का कच्चा सेवन या जूस बनाकर पीने से यूरिन फिल्टरेशन ठीक होता है और मधुमेह को कम करके किडनी सेल्स को जल्दी मरने से बचाता है।