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Mahendragarh-Narnaul News: जहां शब्द कम पड़े, वहां दोस्ती ने साथ निभाया

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फोटो 23डॉ. पंकज गौड़ अपने मित्र डॉ. विक्रम सिंह।स्रोत:डॉ. पंकज गौड़
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नारनौल। जिंदगी में कई रिश्ते समय के साथ बनते और बदलते रहते हैं लेकिन सच्ची दोस्ती का रिश्ता हमेशा दिल के करीब रहता है। एक अच्छा मित्र वह होता है जो खुशियों में साथ मुस्कुराए और कठिन समय में बिना कहे साथ खड़ा हो जाए। कई बार दोस्तों का विश्वास, सहयोग और छोटी-सी प्रेरणा इंसान की पूरी सोच और दिशा बदल देती है। वर्षों पुरानी दोस्ती की यही खासियत होती है कि समय बीतने के बाद भी अपनापन, सम्मान और भरोसा पहले जैसा बना रहता है। ऐसी ही कुछ यादगार दोस्तियों की कहानियां जीवन के अनमोल अनुभवों को सामने लाती हैं।
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दोस्ती जिसने बदली जिंदगी की राह
ग्यारह साल की उम्र तक मैं स्कूल से दूर था और भविष्य धुंधला नजर आता था। ऐसे समय में मेरे मित्र किरोड़ीलाल शर्मा ने मेरा हाथ थामा और मुझे शिक्षा की राह दिखाई। वे खुद मुझे स्कूल लेकर गए। पहले ही दिन 1 से 100 तक गिनती सीखकर मेरा मन पढ़ाई में लग गया। उनकी प्रेरणा से मैंने एमए तक शिक्षा प्राप्त की और सेना में धर्मगुरु के पद पर रहते हुए कप्तान के रूप में सेवानिवृत्त हुआ। उनकी दोस्ती मेरे जीवन का अनमोल उपहार है।- कप्तान जगराम आर्य। केशव नगर, नारनौल


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दोस्ती जो हर पल साथ निभाए
मेरे मित्र डॉ. विक्रम सिंह मेरे जीवन के ऐसे साथी हैं जिन्होंने हर सुख-दुख, सफलता-असफलता और कठिन समय में मेरा साथ दिया। उनके साथ बिताए पल मन को शांति और नई ऊर्जा देते हैं। उनका स्नेह, सरल स्वभाव और सकारात्मक सोच हमेशा प्रेरणा देती है। मेरा विश्वास है कि सच्चा और भरोसेमंद मित्र जीवन की सबसे बड़ी दौलत होता है और मैं स्वयं को भाग्यशाली मानता हूं कि मुझे ऐसा मित्र मिला।-डॉ. पंकज गौड़
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दोस्ती की सिल्वर जुबली को बनाया यादगार
वर्ष 1988 से शुरू हुई हमारी दोस्ती आज भी उसी प्रेम, विश्वास और अपनत्व के साथ कायम है। जीवन के कठिन समय में मित्र बंसी लाल का निस्वार्थ सहयोग मेरे लिए अनमोल उपहार रहा। विद्यालय भवन निर्माण के चुनौतीपूर्ण कार्य में उनका साथ हमेशा याद रहेगा। हमारी मित्रता इतनी खास रही कि हमने मिलकर नगर में पहली बार सिल्वर जुबली का भव्य आयोजन किया जिसकी यादें आज भी दिल में बसी हैं।-डॉ. संजय शर्मा
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दोस्ती की मिसाल बनी भीम-राकेश की जोड़ी
मेरा और राकेश शर्मा का रिश्ता वर्षों पुराना है। हमारी जोड़ी ने नगर में अपनी अलग पहचान बनाई है। आज भी जब किसी कार्यक्रम में हममें से कोई एक अकेला दिखाई देता है तो लोग तुरंत दूसरे के बारे में पूछते हैं। मां चामुंडा के दरबार से लेकर पारिवारिक आयोजनों तक, हमारी दोस्ती और साथ की चर्चा हमेशा होती है। यह रिश्ता मेरे लिए गर्व और खुशी की बात है।-भीमसेन पांडे
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