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यूक्रेन से सकुशल पहुंची बेटी तो माता-पिता के छलके आंसू

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यूक्रेन से लौटी गांव मालड़ा बास निवासी रितिका की मां खुशी से लिपटी हुई। - फोटो : Narnol
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कनीना थाने के तहत आने वाले गांव मालड़ाबास गांव की रितिका 27 फरवरी को सकुशल यूक्रेन से लौट आई है। अपनी बेटी से मिलकर परिवार वालों की खुशी से आंसू बह निकले। पिछले एक सप्ताह से बेटी की चिंता परिवार को सता रही थी तथा सकुशल आने का इंतजार कर रहा था। कभी भगवान से दुआएं मांगी तो कभी रातभर नींद नहीं आई। बोकोविनियन स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी चेरणावित्सी से एमबीबीएस की पढ़ाई करने के लिए पांच दिसंबर को भारत से रितिका रवाना हुई थी लेकिन उन्हें क्या मालूम था कि इस प्रकार के युद्ध के हालात बन जाएंगे कि घर वापस लौटना ही पड़ेगा। अब वह सकुशल लौटने पर उन्होंने भारत सरकार का आभार व्यक्त किया है। बिना किसी खर्चे के भारत लौट आई तथा उन्हें कुछ तकलीफ हुई।
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रितिका के पिता राजबीर सिंह एवं रितिका की मां रेखा देवी ने बताया कि विश्वविद्यालय से रोमानिया बॉर्डर तक पहुंचने के लिए 50 किलोमीटर दूरी बस से तय की जिसमें थोड़ा डर लगा चूंकि रोमानिया बॉर्डर पर एंट्री देरी से हुई इसलिए यहां तकलीफ हुई। तत्पश्चात रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट पहुंचने के लिए 10 घंटे का समय लगा और करीब 500 किलोमीटर दूरी बस द्वारा तय करने के बुखारेस्ट एयरपोर्ट पहुंची। वहां से मुंबई पहुंची। मुंबई में सरकार द्वारा बेहतर प्रबंध किए थे। होटल में रहने और खाने का बेहतर प्रबंध था। तत्पश्चात मुंबई एयरपोर्ट से दिल्ली एयरपोर्ट पहुंची। इस मौके पर माता पिता के खुशी से आंसू झलक आए। मालड़ा बास पहुंच गई। उन्होंने सरकार का आभार जताया कि इस बुरी हालत में उनको सकुशल केंद्र सरकार ले आई।
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