नगर की अनाज मंडी में हैफेड की ओर से 10 अप्रैल से किसानों के गेहूं खरीद शुरू करने जा रहा है लेकिन यह खरीद लचर व्यवस्था के बीच होगी क्योंकि मंडी में न केवल सुविधाओं का अभाव है बल्कि सफाई इंतजाम भी चौपट है। मंडी में 40 लाइसेंस धारी व्यापारी हैं लेकिन इन व्यापारियों को मंडी की तरफ से कोई सुविधा नहीं मिल पा रही है। इस मंडी में आसपास के किसान अपना गेहूं बेचने के लिए आएंगे। उनके लिए न तो टीन शेड की व्यवस्था है और न ही शौचालय की। बारिश आने पर किसानों की मेहनत मिट्टी में मिल सकती है।
नहीं है पानी निकासी की सुविधा
अनाज मंडी में नालियों का बुरा हाल है। सीवरेज व्यवस्था नहीं होने के कारण अनाज मंडी के व्यापारी काफी परेशान है। बारिश आने पर अनाज मंडी में पानी भर जाता है। पानी भर जाने के कारण व्यापारियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। व्यापारी मंडी सीवरेज लाइन डलवाने के लिए मंत्री, सांसद और उपायुक्त को ज्ञापन सौंप चुके हैं लेकिन अभी तक यह बात सिरे नहीं चढ़ पाई।
फड़ों पर नहीं है टिन शेड
वर्तमान में अनाज मंडी के किसी भी फड़ पर टिन शेड नहीं है। इससे व्यापारियों के साथ किसानों को भी परेशानी उठानी पड़ती है। टिन शेड की समस्या काफी वर्षों से बनी हुई है। बादल छा जाने पर व्यापारियों के माथे पर चिंता की लकीरें ाींच जाती हैं। बारिश में व्यापारियों का सारा अनाज भीग जाता है। व्यापारियों को तिरपाल डालकर ही गुजारा करना पड़ता है। किसान चिलकती धूप में फसल बेचने के लिए काफी देर तक खड़े रहते हैं।
सफाई व्यवस्था चौपट
सब्जी मंडी की सफाई व्यवस्था बिल्कुल चौपट हैं। फ़डों के आसपास कई जगहों पर गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। नालियों की भी समय पर सफाई नहीं हो पा रही है। मार्केट कमेटी सफाई करवा भी देती है तो वहां से कचरा नहीं उठाया जाता जिस कारण सारा कचरा हवा से वापस नालियों में भर जाता है और नालियां रूक जाती हैं। नालियां रुक जाने के कारण पानी सड़कों पर आ जाता है। नालियों से इतनी दुर्गंध मारती है कि वहां खड़ा रहना तो दूर निकलना ही दुर्भर हो जाता है।