दो दिनों से पड़ रही उमस भरी गर्मी के बाद रविवार सायं को हुई झमाझम बारिश से शहर जलमग्न हो गया। शहर और आसपास के क्षेत्रों में सायं पांच बजे से 7 बजे तक करीब 2 घंटे हुई बारिश से कई जगहों पर जलभराव हो गया। बारिश से मौसम सुहाना हो गया। नारनौल शहर में मानसून की यह पहली बारिश हुई है। जबकि ग्रामीण क्षेत्र में इससे पहले भी अच्छी बारिश हो चुकी है। रविवार को अधिकतम तापमान 40.0 डिग्री व न्यूनतम तापमान 29.4 डिग्री दर्ज किया गया। शहर में एमएम बारिश रिकार्ड की गई। वहीं बारिश से निचले इलाकों में पानी भर गया। शहरवासियों का कहना है कि इस सीजन की अब तक की सबसे अच्छी बारिश हुई है।
क्षेत्र में तीन दिनों से उमस भरी गर्मी से लोग परेशान थे। रविवार सायं चार बजे आसमान में घने काले बादल छाये और पांच बजे झमाझम बारिश शुरू हुई जो 7 बजे तक जारी रही। बारिश करीब दो घंटे तक हुई। तेज बारिश के कारण शहर में पानी जमा हो गया। इसके कारण शहर के अनेक इलाकों में पानी भर गया। मौसम विभाग के अनुसार 21 जुलाई तक मौसम परिवर्तनशील रहेगा। इस दौरान हल्की व मध्यम बारिश होने की संभावना है।
नगर परिषद ने मानसून की बारिश को लेकर शहर में जलभराव की समस्या से लोगों को निजात दिलवाने के लिए अभी तक कोई ठोस योजना नहीं बनाई है। अभी तक इस सीजन में नारनौल शहर में सिर्फ बूंदाबांदी ही हुई है। रविवार को सायं को हुई झमाझम बारिश से शहर में अनेक जगहों पर हुए जलभराव ने नप की सफाई व्यवस्था को दर्शाता रहा है। नालियों व बड़े नालों की सफाई न होने के कारण शहर में जलभराव हो गया जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
शहर में पुलिस लाइन से किला रोड तक डाली जा रही नई सीवर लाइन लोगों के लिए परेशानी बनी हुई है। रविवार सायं को हुई बारिश के चलते पुलिस लाइन से लेकर किला रोड तक कीचड़ व जलभराव हो गया। जिससे यह मार्ग वाहनों व लोगों के आवागमन के लिए बिल्कूल बंद हो गया। बारिश होते ही कई जगहों पर सीवर लाइन धंस गई। सीवर लाइन के धीमे कार्य के चलते अब लोगों को बारिश के मौसम में काफी परेशानी उठानी पड़ेगी। बारिश के मौसम को देखते हुए प्रशासन से इस मार्ग पर कोई ध्यान नहीं दिया है। जबकि इस मार्ग पर नागरिक अस्पताल होने के कारण दिनभर लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
रविवार सायं जिले में झमाझम बारिश हुई। जिससे किसानों के चेहरे भी खिले हुए थे। बारिश बाजरा, मूंग व कपास की फसल के लाभदायक होगी। कई जगहों पर बारिश न होने के कारण बाजरे की फसल मुरझाने लग गई थी। यह बारिश फसलों के लिए वरदान साबित होगी।