शहर के लोगों को समय पर पेयजल उपलब्ध कराने के लिए एक साल पहले जनस्वास्थ्य विभाग ने 70 सार्वजनिक टंकियों का निर्माण किया। लेकिन इन टंकियों में विभाग की ओर से टैंकरों द्वारा पानी नहीं डालने से शहर में पानी की किल्लत बढ़ गई है।
हालात यह बन गए हैं कि गर्मी के मौसम में लोगों को पानी की कमी खलने लगी है। एक साल से इन टंकियों में पानी नहीं डल रहा है। हालांकि एक बार समाजसेवी सुरेश सैनी ने इन टंकियों में पानी भरने का जिम्मा उठाया था, मगर वह भी गत वर्ष गर्मियों के मौसम में ही चल पाया। सर्दियों के मौसम में जैसे तैसे निकल गया, मगर अब फिर से तेज गर्मी पड़ने की वजह से लोगों को पानी की कमी खलने लगी है। ऐसे में लोग इन सूखी हुई टंकियों में पानी डालने की मांग उठाने लगे हैं।
शहर में पानी की कम आपूर्ति वाले या ऊंचाई वाली जगहों पर नगर परिषद व जनस्वास्थ्य विभाग लाखों रुपये के बजट से शहर के विभिन्न मोहल्लों में करीब 70 सार्वजनिक टंकियों का निर्माण कराया था। इनमें से करीब दस टंकियां डेढ़ वर्ष पूर्व ही बनी थी। एक टंकी पर करीब एक लाख रुपये की लागत आई थी। इस प्रकार 70 टंकियों पर करीब 70 लाख रुपये तक की लागत आई थी।
एक वर्ष पूर्व बनी टंकियों की लागत एक लाख रुपये से अधिक थी। नगर परिषद द्वारा टंकियां बनाए जाने के बाद जनस्वास्थ्य विभाग इन टंकियों में टैंकरों के माध्यम से पानी डलवाता था। जिससे करीब शहर के पांच से दस हजार लोगों को फायदा होता था तथा गर्मियों के मौसम में उन्हें पानी की दिक्कत नहीं आती थी। इन टंकियों से राहगीर भी अपनी प्यास बुझा लेते थे, वहीं पशु-पक्षियों के लिए भी ये टंकियां सहारा थी। मगर अब टंकियों में पानी न डलने के कारण सब सूखा है।
करीब 100 टैंकर डलते थे रोजाना
सार्वजनिक टंकियों में पानी आपूर्ति करने के लिए जनस्वास्थ्य विभाग ने टैंकरों का ठेका छोड़ा हुआ था। ठेके के अनुसार टैंकर चालक टंकी में पानी डालकर वहां के किसी एक व्यक्ति के हस्ताक्षर करवा जनस्वास्थ्य विभाग में पर्ची जमा करा देता था। जिसके बाद ही उसको पेमेंट दी जाती थी। शहर में बनी टंकियों में किसी में एक या किसी में दो टैंकर पानी रोजाना डलता था। इस प्रकार करीब 100 टैंकर पानी के रोज टंकियों में डल रहे थे। शहर में बनी टंकियों में पानी नहीं डालने के आदेश जनस्वास्थ्य विभाग के एसई ने एक वर्ष पूर्व जारी किए थे। आदेशों के तहत कहा गया था कि शहर में पानी आपूर्ति करने वाले टैंकरों को बंद किया जाए। जिसके बाद से इन टंकियों में पानी नहीं डाला जा रहा।