गर्मियों के शुरू होते ही पानी की किल्लत से लोग परेशान हैं। शहर के कई मोहल्लों में दो से तीन दिन में पेयजल की आपूर्ति हो रही है। लोगों के अनुसार डिमांड के अनुसार पानी नहीं मिलने से हाल बेहाल हैं। पानी किल्लत से बचने के लिए 23 वार्डों में योजना के तहत बनाई की करीब 100 टंकियां भी सूखी पड़ी हैं। लोगों को कहना है कि नगर परिषद और जनस्वास्थ्य विभाग को इन टंकियों में पानी की आपूर्ति करवानी चाहिए ताकि लोगों को पानी की समस्या से निजात मिल सके। उधर अधिकारी कहते हैं कि घरों तक पेयजल लाइन पहुंच गई है, इस कारण इन टंकियों का इस्तेमाल की कोई जरूरत नहीं है। लोगों का कहना है कि जब पानी ही नहीं आ रहा है तो इन टंकियों का इस्तेमाल सार्वजनिक रूप से किया जाना चाहिए। तीन साल पूर्व इन टंकियों में पानी डालने के लिए जनस्वास्थ्य विभाग ने आठ से दस टैंकर वालों को परमिट दे रखा था। इसे भी करीब दो साल पूर्व रद कर दिया गया है।
शहर के लोगों को पर्याप्त मात्रा में पेयजल उपलब्ध कराने और शहर में टैंकरों द्वारा आपूर्ति होने वाले पानी को व्यर्थ बहने से रोकने के लिए पूर्व विधायक राधेश्याम ने एक योजना बनाई थी योजना के तहत शहर के उस समय के 21 वार्डों में पेयजल के लिए सार्वजनिक टंकियां बनाई गई। जनस्वास्थ्य विभाग के टैंकर संचालक इन टंकियों में पानी डालते थे। जहां से लोग पानी भरकर अपने घरों में ले जाते हैं। शुरू में नगर परिषद द्वारा पूर्व के 21 वार्डों में 21 टंकियों का निर्माण कराया गया था। इसके बाद वर्ष 2010-11 में शहर में 40 और टंकियां बनाई गई। इनमें से करीब 20 टंकी नगर परिषद और 20 टंकी जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत बनाई गई। इस प्रकार इस वर्ष शहर के पूर्व के कुल 23 वार्डों में 60 टंकियां बनकर तैयार हो गई। 2011-12 के बाद भी 2013 में शहर में करीब 40 टंकियों का निर्माण किया गया। इस कारण इन टंकियों की संख्या बढ़कर 100 हो गई। इन टंकियों में से किसी पर से शहर के एक मोहल्ले और किसी से शहर के दो से तीन मोहल्लों के लोगों को जोड़ा गया।
गंदा पानी आने या कमी में होती थी सहायक
पानी की कम आपूर्ति के अलावा गंदा पानी आने की स्थिति में और सामान्य रूप से भी इन टंकियों में रोजाना पीने का पानी डालने का प्रावधान था। इसके तहत जनस्वास्थ्य विभाग ने करीब आठ से दस टैंकर धारकों को परमिट दिया था। ये टैंकर इन टंकियों में पानी डालने के उपरांत वहां साथ लगती किसी दुकान या घर मालिक से हस्ताक्षर करवाकर पर्ची जनस्वास्थ्य विभाग में जमा कराते थे। जहां से उनको पर्ची के हिसाब से पेमेंट की जाती थी।
एक टंकी पर था एक लाख तक खर्च
जिस समय टंकियों का निर्माण किया गया उस समय बनी टंकियों पर 70 हजार रुपये से एक लाख रुपये तक खर्च हुआ था। अनुमान के मुताबिक सभी टंकियों पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च किया गया था। ऐसे में उस समय खर्च की गई एक करोड़ की राशि का अब लोगों को कोई फायदा नहीं हो रहा है।
कहां-कहां हैं टंकियां
वैसे तो शहर में करीब 100 टंकियां हैं, मगर शहर के कई मोहल्ले ऐसे हैं जहां पानी की कम आपूर्ति होती है। इन टंकियों में पानी का आना बहुत जरूरी है। शहर के प्रत्येक वार्ड में एक टंकी बनी हुई है। वहीं कई वार्ड ऐसे भी हैं जहां छह टंकियां भी बनी हुई हैं। जिनमें शहर के बड़े वार्ड शामिल हैं। शहर के मोहल्ला पर्स में जनस्वास्थ्य विभाग की टंकी, मोहल्ला मिश्रवाड़ा में जीवन की दुकान के पास बनी टंकी, मोहल्ला नई सराय में रविदास मोड़ पर सयैद बाबा के पास नगर परिषद द्वारा बनाई गई टंकी, मीरा जी में हरीसिंह बीईओ के घर के पास, टेकपुरा में जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा बनाई टंकी, मिश्रवाड़ा में जनस्वास्थ्य विभाग की टंकी, संघीवाड़ा में जनस्वास्थ्य विभाग की टंकी, नौ चौक की हवेली के पास कमेटी फंड से बनी टंकी, हीरालाल धर्मशाला के पास जनस्वास्थ्य विभाग की टंकी, पुरानी कचहरी के पास, सैन चौक के पास, राधाकृष्ण मंदिर के पास, मोहल्ला जमालपुर में बनी टंकी, वाल्मीकि बस्ती गस्तीवाड़ा, मोहल्ला बांस में, मोहल्ला रावका में आदि अनेक टंकियां शहर में बनी हुई हैं।
पोस्टर चिपकाने के काम आ रही टंकियां
पानी के अभाव में सूखी पड़ी ये टंकियां अब पोस्टर चिपकाने के काम आ रही हैं। लोग अपनी संस्थाओं के बैनर और पोस्टर इन टंकियों पर चिपका देते हैं। इस कारण इन टंकियों पर लगी टाइलें ढक गई हैं तथा चारों तरफ पोस्टर और बैनर दिखाई देते हैं। इस कारण ये टंकियां अब विज्ञापन लगाने का स्थान बनकर रह गई हैं।