कनीना। गांव सीहोर में पंचायती फार्म हाउस के नजदीक करीब आधा एकड़ भूमि पर खड़े दर्जनों हरे पेड़ों को काटे गए हैं। इससे ग्रामीणों में भारी रोष है। ग्रामीणों का आरोप है कि करीब 80 वर्षों से यह स्थान पक्षियों के सुरक्षित आश्रय स्थल के रूप में जाना जाता था जहां गौरैया सहित विभिन्न पक्षी निवास करते थे। इससे पक्षियों का प्राकृतिक आशियाना उजड़ गया है।
ग्रामीण रविंद्र, धर्मवीर, ढिल्लू सिंह, संदीप यादव, नीरज, रतिराम और परमानंद ने बताया कि पंचायत द्वारा उक्त भूमि को पट्टे पर दिए जाने के बाद पट्टेदार ने बुलडोजर लगाकर क्षेत्र की साफ-सफाई करवाई जिसके दौरान पेड़ उखाड़ दिए गए। ग्रामीणों का कहना है कि इन पेड़ों पर वर्षों से पक्षियों के घोंसले थे और विशेष रूप से गौरैया जैसे पक्षी रहते थे। पेड़ों की कटाई से उनके बसेरे समाप्त हो गए हैं।
ग्रामीणों ने घटना की सूचना वन विभाग को दी जिसके बाद वन विभाग के कर्मचारी संदीप मौके पर पहुंचे और स्थिति का निरीक्षण किया। उन्होंने कटे हुए पेड़ों की तस्वीरें लेकर रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी।
पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मनोज रामबास, शक्ति सिंह, देवेंद्र, महेश, नवीन आदि ने कहा कि एक ओर सरकार और समाज द्वारा पौधरोपण अभियान चलाए जा रहे हैं,वहीं दूसरी ओर वर्षों पुराने पेड़ों को काटा जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो पर्यावरण प्रेमी जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों से मिलकर विरोध दर्ज कराएंगे। ग्रामीणों ने भी मांग की है कि कटे हुए पेड़ों के स्थान पर बड़े स्तर पर पौधारोपण कराया जाए तथा भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।
वर्जन:1
वन विभाग को इस मामले की शिकायत प्राप्त हो चुकी है। पेड़ों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं होगी। इन कटे हुए पेड़ों की जांच की जा रही है
।-विक्रम, वन राजिक अधिकारी, वन विभाग महेंद्रगढ़
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वर्जन:2
संबंधित भूमि पंचायत की है और उसे पट्टे पर दिया गया है। यदि जांच में यह पाया जाता है कि बिना अनुमति पेड़ काटे गए हैं तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी तथा चालान भी करवाया जाएगा।
-हरिश यादव, सरपंच, गांव सिहोर