जिले में नए साल में कोरोना वायरस के मरीज लगातार कम आ रहे हैं। दूसरी ओर इस माह से कोरोना वायरस का टीकाकरण भी शुरू हो गया है। कोरोना काल में मार्च से दिसंबर तक नागरिक अस्पताल में 2,10,461 मरीजों का उपचार हुआ। इसमें न्यू व ओल्ड ओपीडी के साथ आईपीडी के मरीज शामिल हैं। यानी अस्पताल में औसतन हर माह 700 मरीजों का उपचार हुआ। इस दौरान करीब 4822 घरों में बच्चों की किलकारी गूंजी।
बता दें कि कोरोना वायरस के कारण मार्च में लॉकडाउन लग गया था। इसके बाद तीन माह तक जिला नागरिक अस्पताल में फ्लू कार्नर, इमरजेंसी, बच्चों और गर्भवती महिलाओं की ओपीडी लगातार चली। अनलॉक में अस्पताल पहले स्पेशन ओडीपी शुरू की गई। इसके बाद से अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ने लगी। जिले में सितंबर में कोरोना अपने पीक पर था। इस दौरान भी अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की भीड़ लगी रही। इस दौरान भी जच्चा-बच्चा वार्ड और सर्जरी केस होते रहे। डॉक्टर सामाजिक दूरी बनाकर मरीजों के उपचार करने में लगे रहे। ओपीडी में मरीजों को देखते हुए एक दर्जन से अधिक डॉक्टर कोरोना संक्रमण का शिकार हो गए। इससे अस्पताल में कुछ समय के लिए संबंधित डॉक्टरों की ओपीडी बंद करने पड़ी, लेकिन डॉक्टरों ने ठीक होकर दोबार से काम संभाला। (ब्यूरो)
कोरोना काल में डॉक्टरों की कमी हुई दूर
जिला नागरिक अस्पताल में हमेशा डॉक्टरों की कमी बनी रहती थी, लेकिन कोरोना काल में अस्पताल के अलावा अन्य सीएचसी और पीएचसी पर भी डॉक्टरों की तैनाती हुई। इससे पीएचसी स्तर पर भी मरीजों को लाभ मिला और इमरजेंसी सेवाओं के लिए ही नारनौल आना पड़ा। अस्पताल में 42 डॉक्टरों के स्वीकृत पोस्ट में से 40 कार्यरत रहे। ऐसे में डॉक्टरों के आने से मरीजों को राहत मिली।
आईसीयू वार्ड मिला
100 बेड के अस्पताल में पहले आईसीयू की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। कोरोना महामारी में अस्पताल में लोगों और सरकार के प्रयास से आठ बेड मॉडर्न आईसीयू वार्ड की सुविधा उपलब्ध हुई। इससे अस्पताल में गंभीर बीमारी के मरीजों को भी यहां रखा जा सकता है। हालांकि अभी फिजिशियन डॉक्टर न होने से पूरी तरह से आईसीयू नहीं चल रहा है। हालांकि प्रबंधन ने इसके लिए अन्य डॉक्टरों को ट्रेनिंग दे चुका है।
लॉकडाउन में आई थी गिरावट
22 मार्च को जनता कर्फ्यू के बाद 25 मार्च से देश में लॉकडाउन लागू हो गया। इससे नागरिक अस्पताल की सेवाएं भी प्रभावित हुई। बीच में बच्चों व गायनी के अलावा अन्य बीमारियों के मरीजों की ओपीडी भी बंद करनी पड़ी। 18 अप्रैल के बाद नागरिक अस्पताल समेत अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर स्पेशल ओपीडी शुरू हुई थी। इसके बाद अस्पताल में मरीजश भी बढ़ने लगे हैं।
कोरोना काल में डॉक्टरों ने मरीजों को बेहतर सेवाएं दी। कोरोना प्रोटॉकाल के अनुसार मरीजों को उपचार दिया जा रहा है। मरीजों का उपचार करते हुए कई डॉक्टर संक्रमित भी हो गए, लेकिन अन्य डॉक्टरों ने अस्पताल की ओपीडी और आईपीडी समेत अन्य सेवाओं को जारी रखा। अस्पताल में आईसीयू वार्ड उपलब्ध होने से मरीजों को राहत मिलेगी। हालांकि अब मरीज कम आ रहे हैं, लेकिन अभी सतर्कता जरूरी है।
डॉ. आशा शर्मा, एमएस नागरिक अस्पताल
लॉकडाउन में भी अस्पताल में जरूरी सेवाएं जारी रही। इस दौरान गायनी व बच्चों की ओपीडी जारी रही। कोरोना काल में अस्पताल के डॉक्टरों ने बेहतर सेवांए दी। मरीजों के उपचार करते हुए कई संक्रमित हुए भी। अब पहले की तरह मरीज अस्पताल में आने लगे हैं।
डॉ. राजेश कुमार, डिप्टी एमएस, नागरिक अस्पताल
कोरोना के दौरान भी अस्पताल में लगातार डिलिवरी केस हुए। इस दौरान काफी सिजेरियन केस भी हुए है। महिलाओं की ओपीडी लगातार जारी रही। इस दौरान महिला डॉक्टरों ने अच्छा काम किया। कुछ संक्रमण का शिकार भी हुई। कोरोना का संक्रमण कम हुआ है। ऐसे में मास्क और सामाजिक दूरी का ध्यान रखे।
डॉ. अंजली सैनी, प्रभारी गायनी वार्ड