फोटो 13भीलवाड़ा गांव में यहां पर संचालित हो रहा है आंगनबाड़ी केंद्र।संवाद
मंडी अटेली। जहां नन्हे बच्चों के लिए आंगनबाड़ी केंद्र सीखने की जगह होनी चाहिए, वहीं भीलवाड़ा गांव में 98 बच्चों का बचपन जर्जर कमरों में सिमट गया है। अपना भवन नहीं होने के कारण दो आंगनबाड़ी केंद्र राजकीय प्राथमिक पाठशाला के दो कमरों में चल रहे हैं जहां पर्याप्त जगह न होने के कारण खिलौने और शिक्षण सामग्री बोरे में बंद पड़ी है।
बारिश के दिनों में परेशानी और बढ़ जाती है। छत से पानी टपकने लगता है और दीवारों में सीलन आ जाती है। कमरों में बदबू के कारण बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर अभिभावक चिंतित रहते हैं। यही वजह है कि कई माता-पिता बच्चों को रोज केंद्र भेजने से कतराते हैं।
केंद्रों में बच्चों की औसत उपस्थिति 50 प्रतिशत से भी कम रह गई है। छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों के अलावा गर्भवती महिलाएं और धात्री माताएं भी इन केंद्रों से जुड़ी हैं।
सरपंच प्रतिनिधि विक्रम यादव ने बताया कि नए आंगनबाड़ी भवन के लिए पंचायत की जमीन चिह्नित कर ली गई है। ग्राम सभा में प्रस्ताव पास कर निर्माण के लिए उच्च अधिकारियों को भेजा जाएगा। तब तक बच्चों के लिए सुरक्षित और बड़ी वैकल्पिक जगह उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
भवन के लिए जमीन चिह्नित
महिला एवं बाल विकास विभाग की सुपरवाइजर कविता शर्मा ने बताया कि भवन की समस्या को लेकर उच्च अधिकारियों को लिखित में जानकारी दी जा चुकी है। फिलहाल वैकल्पिक भवन नहीं होने के कारण केंद्र स्कूल परिसर में चलाए जा रहे हैं।