फोटो 15 वह शौचालय, जिसकी पोर्टल पर दर्ज कराई गई थी शिकायत। संवाद
नांगल चौधरी। शहर के एक सार्वजनिक शौचालय की बदहाल स्थिति ने नगर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता सुमेर यादव ने 15 अगस्त को इसकी शिकायत शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय हरियाणा पोर्टल पर दर्ज कराई थी। हालांकि, शिकायत का ऑनलाइन निवारण दिखाने के बावजूद मौके पर हालात जस के तस बने हुए हैं।
सुमेर यादव ने शौचालय की गंदगी और खराब हालत की तस्वीरें व स्थान की जानकारी पोर्टल पर अपलोड की थी। तीन दिन बाद 18 अगस्त को उन्हें पोर्टल के माध्यम से शिकायत निवारण का जवाब मिला।
इस जवाब के साथ एक साफ-सुथरे शौचालय की तस्वीर भी भेजी गई थी लेकिन 19 अगस्त को जब यादव ने मौके पर जाकर देखा तो शौचालय की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ था। गंदगी और अव्यवस्था पहले जैसी ही नजर आई। इस घटना ने सरकारी शिकायत निवारण व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
यदि शिकायतकर्ता के आरोप सही हैं तो यह केवल लापरवाही नहीं है। यह जनता की शिकायतों को कागजों और ऑनलाइन रिकॉर्ड में निपटाने की गंभीर प्रवृत्ति को दर्शाता है। सार्वजनिक शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा की सफाई सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
पोर्टल पर शिकायत के निस्तारण की रिपोर्ट कैसे लगाई गई, यह एक बड़ा सवाल है। क्या केवल एक साफ तस्वीर भेज देना ही समस्या का समाधान मान लिया गया? मौके पर कोई सुधार न होने के बावजूद ऑनलाइन निवारण दिखाना चिंताजनक है। यह प्रक्रिया पारदर्शिता और जवाबदेही पर संदेह पैदा करती है
वर्जन:
शिकायत के निस्तारण के संबंध में जो फोटो और रिपोर्ट है उसको चेक करके ही जानकारी दे सकते हैं। जनता की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाता है, समस्याओं का समाधान करना पहली प्राथमिकता है।
-ललित गोयल, नगर पालिका, नांगल चौधरी