महेंद्रगढ़। भारतीय ज्ञान परंपरा और सनातन संस्कृति के अनुपम उपहार ध्यान यानी मेडिटेशन को संयुक्त राष्ट्र ने मानवता के लिए विशेष मानते हुए प्रतिवर्ष 21 दिसंबर को वैश्विक स्तर पर विश्व ध्यान दिवस मनाने की घोषणा की है। यह भारतवर्ष और समस्त भारतीयों के लिए बहुत गौरव का विषय है।
11 वर्षों से जिले में निरंतर योग, सनातन संस्कृति तथा राष्ट्रवाद का प्रचार-प्रसार कर रहे पतंजलि योग समिति के जिला प्रभारी एवं हरियाणा योग आयोग के जिला समन्वयक डॉ. निलेश मुदगल ने बताया कि आज दुनिया प्रतिस्पर्धा से भरपूर चुकी है। इस प्रतिस्पर्धी संसार में स्वयं को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए स्वयं की उत्कृष्टता पर निरंतर कार्य करने की आवश्यकता रहती है।
समय के साथ यह प्रक्रिया तनाव भी पैदा करती है। यदि तनाव को उचित रूप से संभालने की योग्यता मनुष्य के पास नहीं होती तो वह धैर्य और संयम खो देता है। अपने स्वभाव में क्रोध और चिड़चिड़ापन पैदा कर बैठता है। परिणाम स्वरूप निरंतर व्याकुलता, नींद की कमी, हाई बीपी, हृदयरोग, सिरदर्द, माइग्रेन और मधुमेह जैसे अनेकों साइकोसोमेटिक यानी मनोदैहिक रोगों से व्यक्ति घिर जाता है।
हार्मोनल इंबैलेंसिज से दो-चार होना पड़ता है। ऐसी स्थिति में मनुष्य इस सृष्टि और जीवन की सुंदरता चाह कर भी नहीं देख पाता और ना ही उसका आनंद ले पाता। यहां योग और ध्यान भगवान के दिए हुए वरदान के जैसे काम करता है। हालांकि ध्यान महर्षि पतंजलि की ओर प्रदत्त अष्टांग योग में ध्यान योग के कुल आठ में से सातवें स्थान की सीढ़ी है अर्थात ध्यान योग का ही एक अंग है। ध्यान का अभ्यास साधक को भूतकाल की स्मृतियों और भविष्य के भय से मुक्ति दिलाकर वर्तमान का आनंद प्रदान करता है।
निलेश मुदगल ने बताया कि ध्यान का अर्थ एकाग्रता नहीं होता। एकाग्रता टॉर्च की स्पॉट लाइट की तरह होती है जो किसी एक जगह को ही फोकस करती है, लेकिन ध्यान उस बल्ब की तरह है जो चारों दिशाओं में प्रकाश फैलाता है। सामान्यतः आम लोगों का ध्यान बहुत कम वॉट का हो सकता है, लेकिन योगियों का ध्यान सूरज के प्रकाश की तरह होता है जिसकी जद में ब्रह्मांड की हर चीज पकड़ में आ जाती है। योग वेदों, ऋषियों और भारत द्वारा समस्त मानव जाति को अनमोल धरोहर और अनुपम उपहार है।
10 वर्ष पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 177 देशों के अनुमोदन से प्रतिवर्ष 21 जून को विश्व योग दिवस मनाने का निर्णय लिया था। यह भारत की सॉफ्ट पावर की बहुत बड़ी जीत थी। इसी प्रकार गत 29 नवंबर को भारत सरकार की प्रस्तावना पर संयुक्त राष्ट्र महासभा के 79वें वार्षिक सत्र के दौरान 127वें एजेंडा आइटम के तहत 21 दिसंबर को विश्व ध्यान दिवस मनाया जाना सर्व समिति से तय किया गया। 21 जून की तरह अब से 21 दिसंबर हम सब के लिए गौरवान्वित करने वाला दिवस तो है ही, साथ ही समस्त विश्व में शांति और सौहार्द को बढ़ाने का भी जरिया बनेगा। ध्यान के प्रचार एवं प्रशिक्षण के लिए विभिन्न विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में प्रशिक्षण सत्रों का आयोजन किया जाएगा।