फोटो 01 माता पिता व दादी के साथ बैठी पलक जैन। संवाद
- फोटो : 1
नारनौल। जहां आज के दौर में युवा बेहतर कॅरिअर की ओर बढ़ते हैं। वहीं, किरोड़ीमल विश्वविद्यालय में गणित ऑनर्स में टॉपर रही पलक ने सालाना 20 लाख रुपये के पैकेज वाली नौकरी को छोड़कर आध्यात्म का रास्ता अपनाने का फैसला किया है। वह आज परिवार को अलविदा कहेगी।
पलक रविवार सुबह 9 बजे अपना घर परिवार, रिश्तेदार व दोस्तों सब को छोड़कर दिल्ली चली जाएगी और 23 अप्रैल को दीक्षा लेगी। दीक्षा लेने के बाद पलक एक साल तक मौन रहकर जैन धर्म के आगम का गहनता से ज्ञान लेगी।
पलक ने बताया कि दीक्षा लेने के दौरान तो केश लोचन होगा ही। साथ ही साल में दो बार केश लोचन ताउम्र होता रहेगा। ये केश लोचन पहले तो होली के पर्व पर और दूसरा जैन पर्युषण पर्व से पहले किया जाएगा। उन्होंने बताया कि केश लोचन जैन धर्म में साधु-साध्वी की ओर से की जाने वाली एक तपस्या है जिसमें वे सिर, दाढ़ी और मूंछों के बालों को नोचकर निकालते हैं।
माता-पिता की इच्छा को किया पूरा
वैसे तो हर मां बाप की एक ही तमन्ना होती है कि उनकी बेटी की शादी एक सम्पन्न परिवार में हो, ताकि वो भी अपना परिवार बना सके। इसके ठीक विपरीत पलक के माता-पिता हमेशा से ये ही चाहते थे कि उनकी बेटी सांसारिक सुखों को छोड़ आध्यात्म की राह पर चले। संसार में बहुत कम माता पिता होते हैं जिनके बच्चे उनके दिखाए मार्ग पर चलते हैं जबकि पलक ने इस असंभव इच्छा को पूरा कर दिखाया है।
आठ साल की उम्र के बाद ले सकते हैं दीक्षा
पलक ने बताया कि दीक्षा आठ साल की उम्र से लेकर किसी भी उम्र में ले सकते हैं। पलक ने बताया कि मोक्ष की प्राप्ति के लिए कठोर नियमों से ही होकर गुजरना पड़ता है। घास पर नहीं चल सकते, नंगे पैर ही चलना है, पेडों की पत्तियां तक नहीं तोड़ सकते, कहीं भी शौच नहीं कर सकते, भोजन खुद नहीं पका सकते, ताउम्र स्नान नहीं कर सकते सहित कई नियमों का पालन करना पड़ता है।