अभिषेक को मिठाई खिलाकर खुशी मनाते माता-पिता और भाई।
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नारनौल। जहां चाह, वहीं राह... की कहावत संघ लोक सेवा आयोग द्वारा घोषित परिणाम में 288वीं रैंक हासिल करने वाले अभिषेक पर सटीक बैठती है। दोस्त और पिता के मार्गदर्शन में अभिषेक ने यूपीएससी में कामयाबी हासिल की है। उन्होंने एमएनसी की नौकरी छोड़कर यूपीएससी की परीक्षा तीसरी बार में उत्तीर्ण की है।
अमर उजाला से बातचीत में अभिषेक ने बताया कि आईएएस बनने की प्रेरणा दोस्त आईएएस आलोक व पापा राजेश से मिली। बचपन से ही पापा उन्हें आईएएस बनने के लिए प्रोत्साहित करते थे। पापा का एक ही सपना था कि उनका बेटा आईएएस बनकर क्षेत्र का नाम रोशन करें। इसके अलावा उनका दोस्त भी उन्हें आईएएस बनने के लिए प्रेरित करता था। अभिषेक ने बताया कि जब सरकारी नौकरी पाना है तो अच्छी पद की नौकरी की जाए। इसके लिए उन्होंने आईएएस बनने की ठान ली थी। इसके लिए वह कड़ी मेहनत में जुट गए थे। पहले प्रयास में सफलता हासिल नहीं हुई। इसके बाद दूसरे प्रयास में 595वीं रैंक मिली। इसके बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अधिक कठिन परिश्रम में जुट गए। अपने तीसरे प्रयास में उनकी मेहनत रंग लाई और देशभर में उन्होंने 288वीं रैक हासिल की। अभिषेक हरियाणा में कैडर में रहकर लोगों की सेवा करना चाहते हैं। उनका कहना है कि इस क्षेत्र से वह काफी वाकिफ हैं। वे इस क्षेत्र की समस्याओं को अच्छी तरह से समझते हैं।
दोस्त के साथ एमएनसी में करते थे नौकरी, पहले दोस्त बना आईएएस
अभिषेक एनआईटी कुरुक्षेत्र से बीटेक का कोर्स पूरा करने के बाद पटियाला स्थित पेप्सी-को में 17 लाख का पैकेज पर असिस्टेंट मैनेजर थे। वहां पर उनकी दोस्ती झारखंड निवासी आलोक से हुई। नौकरी के दौरान आलोक यूपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण पर गुजरात में आईएएस बन गए। आलोक की प्रेरणा से अभिषेक भी एमएनसी कंपनी की नौकरी छोड़कर दिल्ली में किराये के मकान में रहकर तैयारी में जुट गए। इस दौरान अभिषेक ने कोचिंग सेंटर न कर सेल्फ स्टडी की और ऑनलाइन कोचिंग ली। दोस्त आलोक आईएएस की तैयारी के लिए उसे प्रेरित करते थे। यही कारण था कि वह असिस्टेंट मैनेजर की नौकरी छोड़कर आईएएस की तैयारी में जुट गए।
माता-पिता का सपना किया पूरा
अभिषेक के पिता हेडमास्टर राजेश का सपना था कि उसका बेटा आईएएस बनकर क्षेत्र का नाम रोशन करें। इसके लिए वह उसे बचपन से ही आईएएस बनने के लिए प्रेरित करते थे। पढ़ाई के दौरान पिता ने किसी भी प्रकार की कठिनाई सामने नहीं आने दी। वे उनकी जरूरत से ज्यादा करते थे। पिता का सपना साकार करने के लिए उन्होंने कठिन परिश्रम कर आईएएस की परीक्षा उत्तीर्ण की। अभिषेक की माता गृहणी हैं। भांखरी निवासी अभिषेक ने सरस्वती स्कूल नसीबपुर में प्राइमरी से लेकर बारहवीं तक की पढ़ाई की थी। स्कूल के मुकेश शर्मा, प्रधानाचार्य समेत अन्य ने उसे बधाई दी है। पिता राजेश गांव हरचंद सोहना में हेडमास्टर हैं। यूपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण करने की खबर मिलते ही बधाई देने वालों का तांता लगने लगा। वहीं सोशल मीडिया पर भी लोगों ने बधाई संदेश भेजे।