नारनौल। जिले में इस बार शराब ठेका नहीं खोलने की मांग को लेकर आबकारी विभाग के पास सिर्फ एक गांव मंडलाना का आपत्ति पत्र पहुंचा है। पिछले साल सात गांवों ने ठेका नहीं खोलने की मांग की थी जबकि इससे पहले यह संख्या 11 थी।
विभाग ने मंडलाना की ग्रामीणों की आपत्ति से जुड़ा पूरा डेटा पंचकूला स्थित मुख्यालय भेज दिया है। अब मुख्यालय में गांव के सरपंच को बुलाकर उनका पक्ष जाना जाएगा। इसके बाद तय होगा कि गांव में ठेका खोला जाए या नहीं।
ठेका नहीं खोलने के लिए ग्रामीण सबसे पहले अपना प्रस्ताव बीडीपीओ कार्यालय में जमा कराते हैं। वहां से प्रस्ताव डीडीपीओ कार्यालय और फिर आबकारी विभाग को भेजा जाता है। इसके बाद आबकारी विभाग संबंधित गांव के पुलिस थाने से पिछले दो साल में सामने आए अवैध शराब के मामलों समेत अन्य जानकारी जुटाता है।
आपत्ति के लिए 200 के हस्ताक्षर जरूरी
नियम के अनुसार आपत्ति पत्र पर गांव की आबादी के दस प्रतिशत लोगों के साथ ग्राम सचिव और सरपंच के हस्ताक्षर होना जरूरी है। उदाहरण के तौर पर दो हजार आबादी वाले गांव में 200 लोगों के हस्ताक्षर आवश्यक होंगे।
वर्जन:
इस संबंध में अभी तक मात्र एक ही आपत्ति पत्र मिला है। इस पर संज्ञान लिया जा रहा है और आमजन से अपील है कि शराब सरकार से लाइसेंस प्राप्त ठेके से ही खरीदे। सस्ते के चक्कर में किसी भी अनधिकृत व्यक्ति से शराब खरीदने से बचें, क्योंकि यह जानलेवा हो सकती है।-सूरत सिंह मलिक, डीईटीसी, आबकारी विभाग नारनौल।