शहर के लोगों को गर्मियों में पानी की समस्या से नहीं जूझना पड़ेगा। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने नसीबपुर में टैंक का निर्माण कार्य पूरा कर लिया है। नए टैंक में अगले माह से पानी स्टोर होना शुरू हो जाएगा। इससे 24 दिन तक पानी का स्टोर किया जा सकेगा। इसके निर्माण पर करीब 21 करोड़ रुपये खर्च हुआ है।
बता दें कि नारनौल शहर में नहरी पानी को ट्रीटकर सप्लाई किया जाता है। इसके लिए गांव नसीबपुर व रेवाड़ी रोड नहरी पानी को ट्रीटमेंट करने का प्लांट लगा है। जनस्वास्थ्य के अनुसार कई बार नहरी पानी समय से नहीं मिलने के कारण शहर में पानी की सप्लाई प्रभावित होती है। इसी को ध्यान में रखकर नसीबपुर में एक और वाटर स्टोरेज टैंक का निर्माण करीब एक साल पहले शुरू किया गया था। अब यह टैंक बनकर तैयार हो गया है। पानी सप्लाई करने के लिए मोटर समेत अन्य इंतजाम किए जा रहे हैं। फरवरी तक इस प्रोजेक्ट को ठेकेदार को विभाग को सौंपना है। इसके बाद टैंक का प्रयोग होना शुरू हो जाएगा। नए टैंक के प्रयोग में आने से नसीबपुर में पानी स्टोरेज के लिए तीन टैंक उपलब्ध हो जाएंगे। इससे नहरी पानी को अधिक स्टोर किया जा सकेगा।
एसडीओ गोपाल सिंह ने बताया कि नया वाटर स्टोरेज टैंक बनाकर लगभग तैयार हो गया। टैंक से पंप हाउस तक पाइप लाइन को जोड़ दिया गया है। नए टैंक के लिए पंप हाउस में दो-दो मोटरें लगाई गई हैं। उन्होंने बताया कि नया टैंक शुरू होने से तीन मोटरों की मदद से शहर में एक साथ पानी की सप्लाई हो सकेगी। अभी दो मोटर ही एक साथ चलती हैं।
कंकरीट का बना है नया टैंक
पहले नसीबपुर में ईंट के दो स्टोरेज टैंक बने हैं। लेकिन, नए स्टोरेज टैंक को कंकरीट से बनाया गया है। दूसरा इसका लेवल भी अन्य टैंक से ऊपर रखा गया है। जिससे टैंक का पानी आसानी से पंप हाउस से पहुंच सके और जरूरत पड़ने पर टैंक का 95 फीसदी पानी का उपयोग में लाया जा सके। दूसरा कंकरीट से बाउंड्रीवाल होने से अन्य स्टोरेज टैंक से इसमें अधिक पानी स्टोर हो सकेगा। कंकरीट्र का स्ट्रक्चर होने से खराब होने की संभावना कम है।
24 दिन तक पानी की टेंशन नहीं होगी
अभी नसीबपुर में 1630-1630 लाख लीटर दो वाटर टैंक हैं। दोनों स्टोरेज टैंक की मदद से अभी तक 16 दिन के लिए पानी स्टोर रहता है। इसके बाद पानी का विकारल संकट खड़ा हो जाता है। यदि इसके बाद नहरी पानी नहीं आया तो पानी की सप्लाई बंद हो जाती है। नए वाटर टैंक बनने के बाद अब 24 दिन तक वाटर स्टोर हो सकेगा। ऐसे में यदि नहरी पानी 15 दिन के बजाय 25 दिन बाद भी आएगा तो पानी का संकट नहीं होगा। कई बार जेएलएन नहर से पानी 20-25 दिन में मिलता है। ऐसे में विभाग को पानी सप्लाई करने में परेशानी होती है। दूसरा पानी सप्लाई के शेड्यूल में बदलाव करना पड़ता है और एक वक्त ही पानी देना पड़ता है। नए टैंक से पानी की सप्लाई में समस्या नहीं आएगी।
नसीबपुर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट है प्रमुख
शहर में पानी की सप्लाई नसीबपुर व रेवाड़ी रोड वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से होती है। इसमें करीब 80 फीसदी पानी नसीबपुर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से होता है। हालांकि नसीबपुर गांव में ही गांव के पानी के लिए अलग से प्लांट लगा है। शहर में आपूर्ति के लिए शहर को 14 भागों में बांटा गया है। नसीबुपर से सुभाष पार्क, पुरानी कोर्ट, आईटीआई, लाइब्रेरी, हैफेड, गस्तीवाड़ा, बावड़ीपुर, सलामपुरा व सीनियर सेकेंडरी स्कूल में बूस्टिंग स्टेशन बने हैं। जिनमें कॉलोनियों में पानी की सप्लाई होती है। इसके अलावा रेवाड़ी रोड से प्लांट से पटीकरा गांव, देवीलाल कांपलेक्स, टीबी अस्पताल व माली टिब्बा बूस्टिंग स्टेशन से पानी की सप्लाई होती है।
सवा लाख लोगों की मिलेगी राहत
नारनौल शहर में पानी की गंभीर समस्या है। भूजल स्तर काफी नीचे व फ्लोराइड युक्त होने के कारण लोग पानी का प्रयोग नहीं कर पाते हैं। ऐसे में लोगों को नहरी पानी पर आश्रित रहना पड़ता है। शहर में करीब सवा लाख जनसंख्या है। नसीबपुर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में वाटर स्टोरेज क्षमता बढ़ने से प्रति व्यक्ति 135 लीटर रोजाना पानी मिल सकेगा। विभाग का कहना है कि पहले नहरी पानी की कम उपलब्धता के कारण गर्मी में लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है।
नए वाटर टैंक का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। इसके शुरू होने से शहर के लिए एक माह तक पानी उपलब्ध रहेगा। कई बार नहरी पानी समय पर न आने से समस्या होती है। उम्मीद है कि गर्मियों में लोगों को पर्याप्त पानी मिल पाएगा।
गोपाल सिंह, एसडीओ, पब्लिक हेल्थ नारनौल
अगले माह से नया स्टोरेज टैंक प्रयोग में आना शुरू हो जाएगा। इसके बाद यदि नहरी पानी समय से नहीं आता है तो भी शहर में पानी की सप्लाई प्रभावित नहीं होगी। इससे पानी की स्टोरेज क्षमता एक माह तक हो जाएगी।
केके गिल, कार्यकारी अभियंता पब्लिक हेल्थ