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20 वर्षों में 29 से बढ़कर 50 हजार हुई आबादी, लेकिन स्वास्थ्य व परिवहन सेवाएं वहीं की वहीं

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लघु सचिवालय महेंद्रगढ़। संवाद - फोटो : Narnol
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शहर की आबादी बीस वर्षों में 29 हजार से बढ़कर करीब 50 हजार पहुंच गई है। लेकिन शहर व क्षेत्रवासियों को स्वास्थ्य एवं परिवहन के क्षेत्र में आशा अनुरूप विकास नहीं होने का मलाल है। ऐसा नहीं की पिछले बीस वर्षों में विकास नहीं हुआ है। इस दौरान शहर में सीवर, पार्क, तहसील, सचिवालय, बिजली विभाग का भवन सहित कई विकास कार्य हुए हैं। लेकिन इन विकास कार्यों की गति इतनी धीमी रही कि बढ़ती जनसंख्या की आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं हो पाई।
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10 साल के कार्यकाल में शहर के विकास को लगे पंख
पहले जहां शहर पिछड़े क्षेत्र के रूप में देखा जाता था, वहीं वर्ष 2004 में शुरू हुए विभिन्न विकास कार्यों के साथ धीरे-धीरे प्रगति की ओर बढ़ने लगा। वर्ष 2006 में पूरे शहर में सीवर लाइन डालने से शहरवासियों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हो गई थी। शहर का हुड्डा पार्क भी इसी दौरान विकसित किया गया, जिससे शहर की सुंदरता को चार चांद लगा। इसके उपरांत साल दर साल विकास की रफ्तार बढ़ती गई। सचिवालय, खेल स्टेडियम, तहसील, राजकीय महिला महाविद्यालय सहित अनेक विकास कार्य हुए।
परिवहन के क्षेत्र में पिछड़े
शहर की लगातार बढ़ती आबादी के अनुरूप परिवहन क्षेत्र में विकास नहीं हो पाया है। वर्ष 1995 में शुरू हुआ महेंद्रगढ़ बस स्टैंड अभी भी दूसरे डिपो के रहमोकरम पर चल रहा है। परिवहन के क्षेत्र में बढ़ती आबादी के अनुरूप सेवाएं नहीं बढ़ने से लोगों को अभी भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में बस स्टैंड से लंबी दूरी की महज कुछ ही बसें हैं। वहीं इसी वर्ष बनकर तैयार सब डिपो के शुरू होने का इंतजार है।
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अस्पताल 100 बेड का हुआ, पर नहीं मिली सुविधाएं
महेंद्रगढ़ अस्पताल को 50 बेड से अपग्रेड करके 100 बेड का कर दिया गया, लेकिन यहां पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिलने से लोगों को इसका अधिक लाभ भी नहीं मिल पाया। तीन वर्ष पूर्व अस्पताल में एक्स-रे मशीन का शुभारंभ किया गया था। समारोह के दौरान पूर्व शिक्षामंत्री ने अस्पताल को 100 बेड करने की घोषणा की थी। वर्ष 2006 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को अपग्रेड करके 50 बेड का कर उप नागरिक अस्पताल का दर्जा दिया गया था। इसके लिए नया भवन बनाया गया था। 7 मई 2006 को नए भवन का लोकार्पण किया गया था। लेकिन सुविधाओं के अभाव में अभी भी अस्पताल को महज रेफर अस्पताल के रूप में देखा जा रहा है।

महेंद्रगढ़ बस स्टैंड। संवाद- फोटो : Narnol

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