महेंद्रगढ़। शहर के एक निजी स्कूल के ओडिटोरियम में विरासत कला उत्सव के दूसरे दिन बहुरुपिया नाटक का जीवंत मंचन किया गया। इस नाटक ने दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी।
नगरपालिका की वाइस चेयरपर्सन व राष्ट्रपति अवार्डी मंजू कौशिक मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व विधायक राव बहादुर सिंह ने की। क्षेत्र के वरिष्ठ रंगकर्मी रामबिलास सैनी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
मंजू कौशिक व राव बहादुर सिंह ने अपने उद्बोधन में इस उत्सव की गरिमा बढ़ाने के लिए उत्तर माध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज का धन्यवाद किया।
मंजू कौशिक ने कहा कि नाटक प्रस्तुति की सबसे बड़ी खूबसूरती यह रही कि बहुरूपिया नाटक की टीम में सभी धर्म, भाषा व क्षेत्र के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से अखंड भारत का संदेश दिया। राव बहादुर सिंह ने कहा कि अभिनय के माध्यम से आम आदमी अच्छाई बुराई से परोक्ष अपरोक्ष रूप से जुड़ा जा सकता है।
आयोजकों की ओर से निर्देशित नाटक बहुरूपियों की टीम को मंच पर सम्मानित भी किया गया। मंच संचालन राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता डॉ. धर्मेश कौशिक ने किया।
स्वर्ग रंगमंडल इलाहाबाद की ओर से पारसी थियेटर नौटकी परिवेश को सुसज्जित नाटक बहुरुपिया में अभिनय, गायन, नृत्य, गीत, संगीत व प्रकाश के समावेश में दर्शकों को निरंतर बांधे रखा।
नाटक बहुरुपिया में लोक नाट्य शैली पर आधारित पारसी थियेटर का मिश्रण राधेश्याम बहनेतबील, चमोला, लावणी के द्वारा बहुरूपिया की कहानी को अंत तक गरिमामयी रूप देने का प्रयास किया।
एक दिन राजा ने बहरूपिए से कहा तू त्यागी महात्मा का स्वांग रचाकर नगर में ज्ञान की पताका फहराओ। जिसके परिणाम स्वरूप बहरूपिए के प्रवचन के दौरान अपार भीड़ जुटने लगी। राजा की ओर से रत्नादि भेंट आदि को ठुकराते हुए कहा कि वह अपना स्वांग पूरी ईमानदारी से निभाता है उसे धन की कोई आवश्यकता नहीं।