फोटो नंबर-17दस लक्षण महामंडल विधान के दौरान उपस्थित बच्चे व समाज के लोग। स्रोत: समाज
नारनौल। मोहल्ला नलापुर स्थित श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में दशलक्षण महामंडल विधान के तहत उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना श्रद्धा और भक्ति के साथ की गई। आचार्य अर्जव सागर महाराज के शिष्य मुनिश्री महत् सागर, मुनिश्री विभोर सागर और मुनिश्री सानंद सागर महाराज के सानिध्य में हुए आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। विधान का निर्देशन पंडित ऋषभ जैन शास्त्री ने किया।
प्रवचन में मुनिराज ने कहा कि ब्रह्मचर्य आत्मसंयम और आत्मकल्याण का मार्ग है। इच्छाओं पर नियंत्रण रखने और प्रत्येक जीव को अपने समान मानने से जीवन में धर्म की भावना मजबूत होती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से जिनेंद्र भगवान के बताए मार्ग पर चलने का संदेश दिया।
प्रवक्ता सुरेंद्र जैन ने बताया कि दशलक्षण पर्व दस दिनों तक मनाया जाता है। इसमें क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन और ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना की जाती है। इसके बाद क्षमावाणी पर्व मनाया जाता है।
इस दौरान नलापुर से विशाल शोभायात्रा निकली, जो पुरानी कचहरी, पुल बाजार, मानक चौक और आजाद चौक होते हुए महावीर जैन मंदिर पहुंची। कठिन उपवास रखने वाले श्रावकों के सम्मान में समारोह भी हुआ। समाज ने सभी तपस्वियों की साधना की अनुमोदना की।