कनीना। उप मंडल के गांव करीरा में बाबा भैया मंदिर में श्रीमद् देवी भागवत कथा के पांचवें दिन आचार्य ने पार्वती के विवाह के प्रसंग का वर्णन किया। कथा वाचक पंडित हेमराज भारद्वाज ने सताक्षी महिमा, वराह कथा, हिरण्याक्ष वध, शिव पार्वती विवाह, मनु सतरूपा वंश वर्णन का प्रसंग सुनाया।
कहा कि पर्वतराज हिमालय की घोर तपस्या के बाद माता जगदंबा प्रकट हुईं और उन्हें बेटी के रूप में उनके घर में अवतरित होने का वरदान दिया। बेटी के बड़ी होने पर पर्वतराज को उसकी शादी की चिंता सताने लगी। माता पार्वती बचपन से ही बाबा भोलेनाथ की भक्त थी। एक दिन पर्वतराज के घर महर्षि नारद पधारे और उन्होंने भगवान भोलेनाथ के साथ पार्वती के विवाह का संयोग बताया। उन्होंने कहा कि नंदी पर सवार भोलेनाथ जब भूत-पिशाचों के साथ बरात लेकर पहुंचे तो उसे देखकर पर्वतराज और उनके परिजन अचंभित हो गए। लेकिन माता पार्वती ने खुशी से भोलेनाथ को पति के रूप में स्वीकार किया। इस दौरान भगवान शंकर व पार्वती की झांकी निकाली गई। इस दौरान सुरेंद्र, जय प्रकाश, कृष्ण कुमार, दिनेश, कैलाश, धर्मवीर, रामनिवास, संतोष देवी, रजनी, जितेंद्र सिंह, राहुल, नवदीप, सुरेंद्र, रौशनी देवी, शकुंतला, कुसुम लता, मनीषा, कमलेश, शिवानी, रजनी, प्रियंका, हेमलता, पूजा, सुरेश, मनीषा, कमलेश, शिवानी, रजनी, जितेंद्र सहीत अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।