फोटो संख्या:72- सीहमा में श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर हवन करते श्रद्धालु-- स्रोत- आयोजक
महेंद्रगढ़। सिहमा के निजी स्कूल में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुक्रवार को हवन के साथ समापन किया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं को समापन किया गया।
पंडित कुलदीप भारद्वाज ने बताया कि हवन-यज्ञ से वातावरण एवं वायुमंडल शुद्ध होने के साथ-साथ व्यक्ति को आत्मिक बल मिलता है। यज्ञ से देवता प्रसन्न होकर मनवांछित फल प्रदान करते हैं।
उन्होंने बताया कि भागवत कथा के श्रवण से व्यक्ति भवसागर से पार हो जाता है। कथावाचक ने भंडारे के प्रसाद का भी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि प्रसाद तीन अक्षर से मिलकर बना है। पहला प्र का अर्थ प्रभु, दूसरा सा का अर्थ साक्षात व तीसरा द का अर्थ होता है दर्शन। जिसे हम सब प्रसाद कहते हैं। हर कथा या अनुष्ठान का तत्व सार होता है, जो मन बुद्धि व चित्त को निर्मल कर देता है। मनुष्य शरीर भी भगवान का दिया हुआ सर्वश्रेष्ठ प्रसाद है। जीवन में प्रसाद का अपमान करने से भगवान का ही अपमान होता है। भगवान को लगाए गए भोग का बचा हुआ शेष भाग मनुष्यों के लिए प्रसाद बन जाता है। इस मौके पर अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।