फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mahendragarh-Narnaul News: आमजन करे सहयोग, तभी सुधरेंगे हालात

विज्ञापन
फोटो संख्या:60- लक्की सीगड़ा--संवाद
विज्ञापन
महेंद्रगढ़। पिछले तीन दशक से महेंद्रगढ़ जिले के भूजल स्तर में तेजी से गिरावट आ रही है। ऐसे में जिले को वर्षभर पानी के लिए केवल जेएलएन का ही सहारा है, लेकिन चार दशक से इसकी क्षमता बढ़ाने के बावजूद भी मांग के अनुसार पानी नहीं मिल पा रहा है। जिलेभर में जो पनघट के सार्वजनिक कुएं सदियों से लोगों की प्यास बुझा रहे थे, सभी पानी के अभाव में ठप हो गए हैं। विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने तेजी से गिर रहे भूजल स्तर पर चिंता जताते हुए आमजन से सहयोग की अपील की है।
विज्ञापन

प्रतिनिधियों का कहना है कि चार दशक से जिले में नहरी पानी उपलब्धता को लेकर केवल राजनीति होती आई है। बारिश के पानी को सहेजने के लिए कोई विशेष योजना नहीं बनी। आमजन के सहयोग से ही हालातों में सुधार की उम्मीद की जा सकती है।

जेएलएन की उठान क्षमता बढ़ाने के बावजूद भी नहीं बढ़ा पानी
गत वर्ष महेंद्रगढ़ में जेएलएन पर करोड़ों रुपये खर्च कर उठान क्षमता बढ़ाई थी। इसके लिए नहर एवं सिंचाई विभाग की ओर से नहर को सीसी बेस पर करने के साथ-साथ जिले में पंप सेटों की खरीद, पंप हाउसों की मरम्मत, उपकरणों की खरीद की गई थी। इसकी क्षमता भी बढ़ाई थी, लेकिन 1650 क्यूसेक क्षमता होने के बावजूद भी एक माह में 15 दिन ही महज 400 से 700 क्यूसेक पानी मिल पाता है। इतने पानी से भूजल स्तर रिचार्ज करना तो दूर प्यास बुझाने के लिए भी लाले पड़े रहते हैं।
विज्ञापन

-
सतनाली क्षेत्र में हालात चिंताजनक
वर्षों से नहरी पानी पर राजनीति होती आई है। स्थानीय प्रतिनिधियों ने नहरी क्षमता बढ़ाने के लिए ठोस पैरवी प्रदेश सरकार तक नहीं की। पर्याप्त नहरी पानी के अभाव में सतनाली क्षेत्र में भूजल स्तर के हालात चिंताजनक स्थिति में पहुंच गए हैं। नहरी पानी की उपलब्धता जरूरत के हिसाब से केवल खानपूर्ति है। आमजन को जागरूक होकर बारिश के पानी को भी रिचार्ज में प्रयोग करना होगा। विभाग परियोजनाओं पर पैसा बहा रहा है। जेएलएन की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रयास से सकारात्मक परिणामों की उम्मीद की जा सकती है।
-सवाई सिंह राठौड़, पूर्व प्रधान, राजपूत सभा महेंद्रगढ़।

जिले के लिए बने अलग परियोजनाएं
लगातार गिरते भूजल स्तर के सुधार के लिए प्रदेश सरकार को जिले के लिए अलग से परियोजनाएं तैयार करनी चाहिए। सार्वजनिक भवनों में बारिश के पानी को रिचार्ज के रूप में करने के लिए योजना विशेष बनाई जाए। केवल विभागों के भरोसे रहने से हालात नहीं सुधरेंगे। इंजेक्शन प्रणाली के माध्यम से सभी भवनों से लेकर निजी आवासों में ड्रेनेज बोरवेल बारिश के पानी को भूजल रिचार्ज के रूप में प्रयोग करना होगा। प्रत्येक जिलावासी बारिश के पानी का सदुपयोग करें तो हालात सुधर सकते हैं।
-अधिवक्ता अभयराम यादव, प्रधान, यादव सभा महेंद्रगढ़।
-
बंद पड़े बोरवेल का रिचार्ज के रूप में हो प्रयोग
पिछले दो दशक में तेजी से जिलेभर में बोरवेल बंद हो गए हैं। प्रदेश सरकार इन बोरवेल के माध्यम से भूजल स्तर रिचार्ज के लिए योजना तैयार करे तो हालात अधिक सुधरेंगे। किसान से लकर आमजन तक हर वर्ग को भूजल स्तर की स्थिति को ध्यान में रखते हुए एक-एक बूंद का सदुपयोग करना होगा। किसी भी रूप में व्यर्थ पानी की बर्बादी को रोकने के लिए सभी सहयोग करें।
-दिनेशचंद्र वैद्य, प्रधान, ब्राह्मण सभा महेंद्रगढ़।


पुराने जलाश्यों एवं जोहड़ों का हो जीर्णोद्धार
जिलेभर में सदियों से लोगों की प्यास बुझाते आए जलाश्यों, बावड़ियों का जीर्णोद्धार कर बारिश के पानी को अधिक से अधिक सहेजकर इसे भूमि की गहराई तक पहुंचाया जा सकता है। नगरपालिका को नए बनने वाले भवनों में बारिश के पानी के लिए ड्रेनेज व्यवस्था के आधार पर ही एनडीसी जारी करनी चाहिए। प्रदेश सरकार नहरी पानी की क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे जिससे बिगड़ते हालातों को सुधारा जा सके।
-मुकेश मेहता, प्रधान, रोटरी क्लब महेंद्रगढ़
-
नहरी पानी पर न हो राजनीति
वर्षों से नहरी पानी पर राजनीति होती आई है। लेकिन जिले को जेएलएन के माध्यम से मिलने वाले पानी में कोई विशेष वृद्धि नहीं हुई। इस मुद्दे पर सभी को एकजुटता से काम करना होगा। नहरी पानी आधारित परियोजनाएं तैयार करने की बजाए बारिश के पानी को रिचार्ज के रूप में प्रयोग करने वाली योजनाओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए। नहरों में वर्षभर पानी की उपलब्धता के लिए योजनाएं बनें जिससे हालात सुधरेंगे।
-सुरेंद्र बंटी, प्रधान व्यापार मंडल महेंद्रगढ़।

क्षमता से अधिक परियोजनाएं बनी समान वितरण में बाधा
नहर एवं सिंचाई विभाग की ओर से जेएलएन में उपलब्ध पानी की क्षमता से अधिक परियोजनाएं तैयार कर दी। जिले में नहरी पानी का समान वितरण करना गंभीर चुनौती है। नई परियोजना बनाने से से पहले विभाग उपलब्धता को ध्यान में रखें। केवल तीन माह मिलने वाले अतिरिक्त पानी की परियोजनाएं नौ माह सूखी पड़ी रहती हैं। आमजन को भी इसे अभियान के रूप में लेना होगा तभी भविष्य में इस सकंट से बचा जा सकता है।
-लक्की सीगड़ा, प्रधान, बीएमडी क्लब सीगड़ा।

फोटो संख्या:60- लक्की सीगड़ा--संवाद

फोटो संख्या:60- लक्की सीगड़ा--संवाद

फोटो संख्या:60- लक्की सीगड़ा--संवाद

फोटो संख्या:60- लक्की सीगड़ा--संवाद

फोटो संख्या:60- लक्की सीगड़ा--संवाद

फोटो संख्या:60- लक्की सीगड़ा--संवाद

फोटो संख्या:60- लक्की सीगड़ा--संवाद

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें