फोटो नंबर-18अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में विचार रखते गणमान्य लोग। संवाद
नारनौल। शहर की सड़कों पर घूम रहे आवारा पशुओं से लोगों का जनजीवन प्रभावित हो रहा है। शहर में यह समस्या लंबे समय से है। नगर परिषद इसके लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। बेसहारा गोवंश को पकड़ने के लिए टेंडर छोड़ा गया है जबकि बंदरों व कुत्तों को पकड़ने के का टेंडर जारी है। इसके बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं आए हैं।
अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से शनिवार को किला रोड स्थित बहन मिश्री देवी आश्रम में आयोजित संवाद में लोगों ने यह बात कही। लोगों ने शहर में बढ़ रहे बेसहारा गोवंश के आतंक पर चिंता जताते हुए कहा कि आए दिन इनके कारण हादसे हो रहे हैं। कई बार इस समस्या के बारे में अधिकारियों को अवगत कराने के बाद भी केवल ‘अभियान चल रहा है’ का जवाब ही मिलता है।
लोगों ने बंदरों की बढ़ती संख्या और उन पर नियंत्रण न होने की समस्या भी उठाई। बंदरों के हमलों से कई लोग घायल हो चुके हैं और एक महिला की मौत होने का मामला भी सामने आ चुका है। महिलाओं और बच्चों के लिए घर से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है।
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क्षेत्र में बंदरों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है लेकिन बंदरों को पकड़ कर सुरक्षित स्थान पर छोडने की प्रक्रिया अभी तक शुरू नहीं की गई है।-दुलीचंद शर्मा, प्रधान वरिष्ठ नागरिक संगठन
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रास्ते में चलते हुए बंदर हाथ से खाने-पीने की चीजें छीन लेते हैं। वहीं घरों की छत पर रखी पानी की टंकी और घर में लगे पेड़-पौधों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। -शिव हरि अग्रवाल, सेवानिवृत्त प्रोफेसर
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गोवंश को पकड़ने का काम केवल खानापूर्ति बनकर रह गया है। गोवंश झूंड बनाकर घूमते रहते हैं। पहले भी कई लोग हादसों का शिकार हो चुके हैं। -भागीरथ, सेवानिवृत्त हेडमास्टर
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घर के आस-पास आवारा कुत्ते घूमते रहते हैं। कई बार कुत्तों ने लोगों को काटा है। प्रशासन को इस तरफ ध्यान देना चाहिए। -बीएल सैनी, सेवानिवृत्त डीएफएससी