गोर्वधन से अगले दिन पड़ने वाले इस त्योहार पर बहने व्रत रखकर भाई का तिलक करने के साथ गोले एवं मिसरी भेंट कर उनकी लंबी आयु की कामना की। भाई भी बहन को उपहार के रूप में नकदी, आभूषण, कपड़े या उनकी पसंद की अन्य कोई वस्तु भेंटकर अपने फर्ज को निभाया।
शनिवार को भाई-बहन के स्नेह का भैया दूज होने के चलते कहीं शादीशुदा बहनें भाई का टीका करने ससुराल से मायके आई तो कहीं भाई टीका कराने बहनों की ससुराल के लिए रवाना हुए। भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक भाई दूज (यम द्वितीया) का पर्व शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक पूर्ण श्रद्धा एवं उत्साह से मनाया गया। इस अवसर पर बहनों ने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी आयु, उन्नति एवं बेहतर भविष्य की कामना की। ज्योतिर्विद पं. कृष्ण कुमार शर्मा ने बताया कि भाई दूज पर्व भाई बहन के स्नेह को बढ़ाने वाला कहा गया है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इस पर्व की शुरूआत परमपिता ब्रह्माजी की आज्ञानुसार सूर्य और संध्या के पुत्र मृत्यु के देवता राजा यम को प्रसन्न करने के लिए उनकी बहन यमी (यमुना) द्वारा की गई थी।
बस स्टैंड इंचार्ज वेदप्रकाश ने बताया कि भैया दूज के पर्व को ध्यान में रखते हुए बस स्टैंड पर अतिरिक्त व्यवस्था की गई थी। लेकिन इस बार अधिक भीड़ नहीं रही। एक बस को रिजर्व रखा गया जरूरत के अनुसार बसों का संचालन किया गया। किसी रूट पर अधिक भीड़ रही वहां अतिरिक्त फेरे भी बढ़ाए गए।