निजामपुर। विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस के अवसर पर क्षेत्र के वरिष्ठ नागरिकों ने समाज और परिवारों से बुजुर्गों के प्रति सम्मान, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का भाव रखने की अपील की।
वरिष्ठ नागरिकों का कहना है कि बुजुर्ग परिवार की धरोहर होते हैं। उनके अनुभव और मार्गदर्शन से नई पीढ़ी को दिशा मिलती है, लेकिन बदलती जीवनशैली और एकल परिवारों के बढ़ते चलन के कारण कई बुजुर्ग उपेक्षा, अकेलेपन और मानसिक पीड़ा का सामना कर रहे हैं।
बुजुर्ग बोझ नहीं, परिवार की असली पूंजी है। बुजुर्गों ने अपना पूरा जीवन परिवार और समाज के लिए समर्पित किया है। ऐसे में वृद्धावस्था में उन्हें सम्मान और सहयोग मिलना चाहिए।
-नित्यानंद शर्मा (80), नांगल चौधरी
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बुजुर्गों को आर्थिक सहायता से अधिक अपनेपन और सम्मान की जरूरत होती है। परिवार के सदस्य यदि उनके साथ समय बिताएं तो उनकी आधी परेशानियां स्वतः दूर हो सकती हैं।
-महावीर प्रसाद (75), नांगल चौधरी
संयुक्त परिवारों के बिखरने से बुजुर्गों की समस्याएं बढ़ी हैं। पहले परिवार में बुजुर्गों की राय को महत्व दिया जाता था, लेकिन अब कई जगह उन्हें अकेलापन झेलना पड़ रहा है।
-अमीलाल (72), भुंगारका
मोबाइल के जमाने में युवा पीढ़ी बुजुर्गों को समय कम देती है। समाज में युवाओं को बुजुर्गों की सुरक्षा और सम्मान के प्रति अधिक जागरूक होने की जरूरत है।
-मोहर सिंह (68), लूजोता
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माता-पिता बच्चों को जीवनभर सहारा देते हैं, इसलिए वृद्धावस्था में उनकी सेवा और देखभाल करना हर संतान का नैतिक दायित्व है।
-रमेश (70), दनचोली
बुजुर्गों की सुरक्षा, युवाओं की जिम्मेदारी है। जिस तरह बचपन में माता-पिता ने हमारा हाथ थामा था, उसी तरह बुजुर्ग अवस्था में उनका साथ देना संतान का भी कर्तव्य और संस्कार दोनों है।
-माया देवी (68), नांगल चौधरी
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वर्जन :
बुजुर्गों के साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार गंभीर विषय है। ऐसे मामलों में काउंसिलिंग करवाई जाती है। पुलिस वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह संवेदनशील है। अगर किसी बुजुर्ग के साथ शारीरिक, मानसिक या आर्थिक शोषण होता है तो वे बिना संकोच पुलिस से संपर्क करें। शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
-भगत सिंह, निजामपुर थाना प्रभारी