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बेसहारा गोवंश बने परेशानी का सबब, दुकान से लौट रही छात्रा को घायल किया

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नप का पशुओं को पकड़ने का अभियान सुस्त, छात्रा को किया घायल
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ठेकेदार ने तीन माह में पकड़े सिर्फ 192 बेसहारा पशु
अभी भी शहर में घूम रहे सैकड़ों बेसहारा पशु, इनकी वजह से रोजाना हो रहे हादसे
बेसहारा पशु ने खाना का सामान लेने गई छात्रा को किया घायल, रेफर
फोटो नंबर 2
संवाद न्यूज एजेंसी
नारनौल। दुकान से खाने-पीने का सामान लेकर लौट रही छात्रा पर बेसहारा गोवंश ने हमला कर दिया, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गई। छात्रा की गंभीर हालत को देखते हुए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है। इससे दो दिन पहले भी दो गोवंशों में लड़ाई हो गई थी, जिससे कोई जानी नुकसान तो नहीं हुआ, लेकिन वाहन चालकों और दुकानदारों की चिंता बढ़ा दी थी। बेसहारा पशुओं के हिंसक होने के कारण नगर परिषद के बेसहारा पशुओं के पकड़ने के अभियान की पोल खुलती नजर आ रही है।
गांव गोद निवासी छात्रा खुशबू राजकीय बहु तकनीकी संस्थान की छात्रा है। वह संस्थान के पास ही श्याम कॉलोनी में किराये पर मकान लेकर अपने भाई के साथ रहती है। रविवार की सुबह वह एक दुकान से खाने का सामान लेने के लिए गई थी। जब वह लौट रही थी तो उस पर एक बेसहारा गोवंश ने हमला कर दिया, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गई। छात्रा को नागरिक अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से उसकी गंभीर हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार देकर हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया।
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नप ने तीन माह में सिर्फ 192 पशु ही पकड़े
नगर परिषद ने भले ही ठेका देकर पशुओं को पकड़ने का दावा कर रही है, लेकिन शहर के विभिन्न मोहल्लों व बाजारों में नजर डाली जाए तो प्रशासन के दावे हकीकत से कही परे दिखाई पड़ रहे हैं। बार-बार बेसहारा पशुओं की वजह से हो रहे हादसों के बाद भी प्रशासन इस तरफ ध्यान नहीं दे रहा है। हालांकि इन पशुओं को पकड़ने के लिए दिसंबर में ठेका दिया गया था, पर तीन माह में केवल 192 पशुओं को ही पकड़कर नंदीशाला पहुंचाया गया है। शुरुआत में प्रतिदिन 10 से अधिक पशुओं को पकड़कर गोशाला में छोड़ा गया, लेकिन इस समय रोजाना 2 से 3 पशुओं को ही पकड़ा जा रहा है। नारनौल शहर में 700-800 के करीब बेसहारा पशु शहर के विभिन्न मोहल्ला, बाजारों व सड़कों पर घूम रहे हैं। नंदी गोशाला में 77 पशुओं को विभिन्न गांवों के लोगों द्वारा भी छोड़ा गया है। अक्सर भीड़भाड़ वाले स्थानों पर कई बार ये पशु हिंसक रूप धारण कर लेते हैं, जिससे बाजार व सड़क के किनारे खड़े वाहन क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। राहगीरों को भी अपनी चपेट में ले लेते हैं। जबकि मुख्य सड़कों पर बीचोंबीच बैठ जाते हैं। जिससे वाहन चालकों को काफी मुश्किल हो जाती है।
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पशुओं के कारण कुछ वर्ष पूर्व दो लोगों की हो चुकी है मौत
बेसहारा पशुओं का आतंक इस कदर है कि ये राह चलते लोगों को भी अपनी चपेट में ले लेतेे हैं। जिससे कई लोग घायल हो चुके हैं। वहीं कुछ वर्ष पूर्व नारनौल व महेंद्रगढ़ में एक-एक व्यक्ति की मौत भी हो चुकी है। कुछ माह पूर्व शहर के एक मोहल्ला के बुजुर्ग को बेसहारा पशु ने घायल कर दिया था। जिसे उपचार के लिए परिजनों द्वारा जयपुर ले जाया गया था। वहीं कुछ दिन पूर्व मोहल्ला देवस्थान में बुजुर्ग व महिला बाल-बाल बच गए थे।
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वर्जन
शहर में बेसहारा पशुओं को पकड़ने का अभियान चलाया गया है। अब तक सैकड़ों पशुओं को पकड़कर गोशाला भेजा जा चुका है। ठेकेदार को शहर में घूम रहे बेसहारा गोवंश को जल्द से जल्द पकड़ने के निर्देश दिए जाएंगे। जल्द ही शहर को बेसहारा पशुओं से मुक्त किया जाएगा। -सुमनलता, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद नारनौल।
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