झज्जर। शहर का भूजल स्तर खारा है जिसमें फ्लोराइड और नाइट्रेट की मात्रा भी कई जगहों पर ज्यादा है। इसके अलावा शहर के अधिकतर लोग भी सरकारी पानी की बजाय कैंपरों की सप्लाई पर निर्भर हैं। जिन कॉलोनियों में पेयजल सप्लाई के कनेक्शन नहीं हैं वहां लोग नियमित रूप से कैंपर लेते हैं।
जन स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जनवरी माह में कुल 71 सैंपल लिए गए जिसमें से तीन फेल पाए गए। इसके अलावा पिछले एक साल में जन स्वास्थ्य विभाग ने जिले भर से 7012 सैंपल लिए जिसमें से 571 सैंपल फेल पाए गए थे। यानी करीबन 12 प्रतिशत सैंपल कसौटी पर खरा नहीं उतर सके।
नवंबर माह में 569 सैंपल लिए गए थे जिसमें 14 और दिसंबर माह में लिए गए 439 सैंपल में से 12 सैंपल फेल पाए गए थे। जिले में 80 प्रतिशत नहरी और 20 प्रतिशत एरिया में ट्यूबवेल से सप्लाई होती है।
अधिकतर हिस्से में भूजल स्तर काफी ऊंचा है यानी चौव्वा है। ऐसे में पानी में खारापन है जो पीने योग्य बिल्कुल नहीं है। छिक्कारा चौक के आसपास सरकारी सप्लाई में टीडीएस की मात्रा 385 पाई गई है जबकि देसवाल कांप्लेक्स में 185, पुराने बस स्टैंड के नजदीक 184, जलघरों के आसपास 180 से 190 टीडीएस पाया गया है।
जन स्वास्थ्य विभाग के एसडीओ नवीन कुमार का कहना है कि सरकारी पेयजल सप्लाई की पूरी तरह से सफाई होती है। इसके बाद शहर में सप्लाई छोड़ी जाती है। इसका टीडीएस भी बिल्कुल ठीक है।
भूजल में टीडीएस की मात्रा ज्यादा
शहर के भूजल में टीडीएस की मात्रा बहुत ज्यादा है। यह 500 से 1500 तक है। देसवाल कांप्लेक्स में 1500 से 1600, पुराने बस स्टैंड के पास 800 से 900 टीडीएस पाया गया है। इसके अलावा बीकानेर चौक के पास 600, बादली रोड पर 800 टीडीएस मिला है।
जलघरों के पास बने नलकों से पानी भर रहे लोग
शहर में तीन घर हैं जो गुरुग्राम रोड, सांपला रोड और पुरानी तहसील रोड पर हैं। इन जलघरों के आसपास का टीडीएस ठीक है। यहां तक कि सरकारी सप्लाई का टीडीएस भी ठीक है। ऐसे में इन जलघरों के आसपास नलके व पानी सप्लाई के नल लगे हुए हैं जिन पर सुबह-शाम काफी संख्या में लोग पानी भरने के लिए आते हैं।
09jjrp12- पुरानी तहसील रोड पर जलघर के बाहर नल से पानी भरता व्यक्ति। संवाद