महेंद्रगढ़। गांव मालड़ा के लोगों ने अपनी मेहनत और प्रतिभा से जिले का नाम पूरे देश में रोशन किया है। यहां के कई बेटे-बेटियां अलग-अलग क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन गए हैं।
गांव के कर्नल सुरेश, शौर्य चक्र सम्मानित मेजर बिजेंद्र सिंह, मेजर राकेश यादव, कैप्टन प्रज्ञा, कैप्टन रिंकू यादव और लेफ्टिनेंट कमांडर हनुमान सिंह ने सेना में देशसेवा कर गांव का गौरव बढ़ाया है। इनके साहस और समर्पण की चर्चा पूरे क्षेत्र में होती है।
इसके अलावा, गांव के नेकी राम ने भी समाज सेवा में अहम योगदान दिया। उन्होंने स्कूल और जोहड़ों के लिए अपनी जमीन दान कर शिक्षा और विकास की दिशा में बड़ा कदम उठाया। मालड़ा गांव के ये सभी लोग आज युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं और गांव का नाम गर्व से ऊंचा कर रहे हैं।
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जानिये शूरमाओं के कार्य और पहचान
मैंने अपनी प्राथमिक और उच्च शिक्षा अपने गांव के राजकीय विद्यालयों से प्राप्त की तथा स्नातक महेंद्रगढ़ से किया। पिछले 20 वर्षों से मैं अपने क्षेत्र में बिजली, पानी और जनसुविधाओं की कमी को स्थानीय प्रशासन के संज्ञान में लाकर उनके समाधान में सहयोग कर रहा हूं। मैं पर्यावरण संरक्षण, जरूरतमंद सहायता व हेमसा प्रदेश प्रवक्ता रूप में सक्रिय हूं।
-सुजान मालड़ा, कर्मचारी नेता
मैंने कक्षा 12वीं तक की पढ़ाई महेंद्रगढ़ के एक निजी स्कूल में की और साथ ही कोचिंग लेकर 15 अगस्त 2023 को बीएसएफ में असिस्टेंट कमांडेंट भर्ती हुए। ताऊ फौज में थे और पिता रणसिंह स्वास्थ्यकर्मी हैं। नौकरी के लिए अच्छी तैयारी की और परिजनों का भी पूरा सहयोग मिला है। फिलहाल (वेटनरी एमएस रेडियोलॉजिस्ट) के पद पर त्रिपुरा में कार्यरत हैं।
-डॉ. विकास यादव, असिस्टेंट कमांडेंट
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मैं आर्मी में बीस वर्ष पहले भर्ती हुआ और 2019 से दिल्ली हेड ऑफिस में बतौर लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर कार्यरत हैं। छोटा भाई सुनील कुमार भी सेना में कार्यरत है। साधारण परिवार में जन्म हुआ और अपनी मेहनत व परिजनों के सहयोग से आज इस मुकाम तक पहुंचे हैं। बिना किसी अतिरिक्त पढ़ाई के जमीन से सफलता तक का सफर पूरा किया।
-राकेश यादव, लेफ्टिनेंट कर्नल
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मेरे पिता सत्यवीर शर्मा का मेरी सफलता में काफी योगदान रहा है। शुरू से ही पढ़ाई में रूचि रही और अच्छी नौकरी की तलाश रही। अपनी काबिलियत के दम पर आर्मी व एक अन्य सरकारी नौकरी प्राप्त की, लेकिन 2016 में अहमदाबाद आरबीआई में नौकरी लगी। अब तीन साल से मुंबई में कार्यरत हूं।
-मनोज शर्मा, असिस्टेंट जरनल मैनेजर, आरबीआई
मेरे दादा सूबेदार मेजर रिसाल सिंह का जन्म 1922 को हुआ था। उन्होंने दसवीं तक की पढ़ाई आर्मी बोर्डिंग से की थी। 1940 में वे पैरा मिलिट्री में भर्ती हुए और 28 वर्षों के सेवाकाल में उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध में लड़ाई लड़ी। इस दौरान उनको पदक भी मिले और 2024 को 98 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया। -
नवीन सिंह, सूबेदार मेजर
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आईटीबीपी फोर्स में वर्ष 1988 को जीडी सब-इंस्पेक्टर बने, 1994 से 1999 तक नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो जोधपुर में इंटेलिजेंस ऑफिसर, एक साल संयुक्त राष्ट्र , डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इंडियन फॉर्म्ड पुलिस यूनिट के डिप्टी कॉन्टिंजेंट कमांडर रहे। इनके अलावा वीरता व सहायता के लिए तीन पुलिस पदक मिल चुके हैं। दोनों बेटे विदेशों में नौकरी कर रहे हैं।
-अशोक यादव, कमांडेंट
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परिवार में पति बिजेंद्र यादव भी सेना में कर्नल पद पर हैं और मैं भी इसी कर्नल पद पर हूं। बच्चे अभी पढ़ाई कर रहे हैं। सितंबर 2005 में सेना में आने का अवसर मिला और सिंदूर ऑपरेशन में भी देशसेवा करने का सौभाग्य मिला है। इनके अलावा सेना के अन्य ऑपरेशन में भी शामिल होकर कार्य किया।
-प्रज्ञा यादव, कर्नल
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सेना में वर्ष 2005 में भर्ती हुए और इसकी प्रेरणा पिता कैप्टन मोहनलाल यादव से मिली। साल 2012 में उनकी टीम ने आतंकवादियों को ढेर किया। इस वीरता के लिए राष्ट्रपति से शौर्य चक्र अवॉर्ड मिला। इसके अलावा यूएन मिशन में दो आर्मी कमेंडेशन पदक मिल चुके हैं। पत्नी प्रज्ञा भी कर्नल पर हैं। इस मुकाम में पिता का काफी सहयोग व मार्गदर्शन रहा है।
-बिजेंद्र यादव, कर्नल
फोटो संख्या:63 बिजेंद्र यादव
फोटो संख्या:63 बिजेंद्र यादव
फोटो संख्या:63 बिजेंद्र यादव
फोटो संख्या:63 बिजेंद्र यादव
फोटो संख्या:63 बिजेंद्र यादव
फोटो संख्या:63 बिजेंद्र यादव
फोटो संख्या:63 बिजेंद्र यादव
फोटो संख्या:63 बिजेंद्र यादव