श्मशान घाट के लॉकर में रखी अस्थियां।
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नारनौल। कोरोना निश्चित तौर पर खतरनाक जानलेवा बीमारी है। मगर क्या इतनी खतरनाक है कि मृतक का दाह संस्कार करने के बाद बनी राख को भी छूने से अपने भी भय खाएं। इतनी कि हजारों साल से चली आ रही परंपराओं को भी खत्म कर दिया हो। स्वर्ग आश्रम में रखी अस्थियों को देखकर तो यही अंदाजा लगाया जा सकता है कि लोग कोरोना के भय से अपनों की अस्थियों को हाथ लगाने से भी डर रहे हैं।
शहर में पांच श्मशान घाट हैं मगर केवल एक में ही अस्थियों को रखा गया है। पिछले कुछ दिनों से यहां पर दस से बारह मृतकों की अस्थियों को लॉकर में रखा गया है। लॉकर की चाबी परिजनों के पास है। मगर लेने कोई नहीं आया है। शमशान घाट के पंडित अशोक के अनुसार धार्मिक मान्यता है कि पितृ पक्ष में तर्पण, श्राद्ध और अस्थि विसर्जन से पूर्वजों को मोक्ष मिलता है। मगर इस समय सामाजिक मान्यताएं कोरोना के भय से बहुत छोटी हो गई हैं।
अग्रवाल वैश्य समाज करेगा अस्थि विसर्जन
अग्रवाल वैश्य समाज के विधानसभा अध्यक्ष संदीप नूनीवाला का कहना है कि वे श्मशान घाट में रखी अस्थियों का विसर्जन करेंगे। इसके लिए पांच जून से अभियान शुरू किया जाएगा। जिन मृतकों की अस्थियां रखी हुई हैं उनके परिजनों से संपर्क साधा जा रहा है। इसके बाद आगे की क्रियाएं शुरू की जाएंगी।
पूरे प्रदेश में चलाएंगे अभियान
(फोटो) अग्रवाल वैश्य समाज के प्रदेश अध्यक्ष अशोक बुवानीवाल ने बताया कि अस्थि विसर्जन के लिए दो कार्यक्रम निर्धारित किए गए हैं। पहला पांच जून से व दूसरा पंद्रह से शरू होगा। इसमें प्रदेशभर से अस्थियां एकत्र कर हिंदू धर्म की के मान्यताओं के अनुसार गंगा नदी में विधि विधान से प्रवाहित किया जाएगा।